झंडा लगाने वाले कार्यकर्ता से जनपद उपाध्यक्ष तक…, न झुके, न रुके… संघर्ष के दम पर जनपद उपाध्यक्ष बने शिशु-शशि…

धरमजयगढ़ क्षेत्र की राजनीति में जनपद उपाध्यक्ष शिशु-शशि का सफर कई कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। एक समय ऐसा था जब वे पार्टी के साधारण कार्यकर्ता के रूप में संगठन के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाते थे। पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेने से लेकर झंडे-बैनर लगाने तक का कार्य उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया। संगठन के प्रति उनकी मेहनत, लगन और सक्रियता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया।
मेहनत का मिला फल, जनता ने भी जताया विश्वास
लगातार वर्षों तक संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहने का परिणाम यह रहा कि शिशुपाल गुप्ता और शशि पटेल को जनपद उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पद उन्हें किसी संयोग से नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष, समर्पण और जनसेवा के कारण प्राप्त हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने भी उनके कार्यों पर भरोसा जताते हुए उन्हें समर्थन दिया, जिससे उनकी राजनीतिक यात्रा को नई दिशा मिली।

जनपद उपाध्यक्ष बनने के बाद बढ़ी लोकप्रियता
जनपद उपाध्यक्ष बनने के बाद शिशु-शशि लगातार क्षेत्र की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे आम जनता से सीधे संवाद करते हैं और समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत रहते हैं। उनके कार्यकाल में विकास और जनसंपर्क को प्राथमिकता दिए जाने से लोगों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है। कार्यकर्ता से जनपद उपाध्यक्ष तक का उनका सफर यह साबित करता है कि राजनीति में मेहनत, ईमानदारी और जनता का विश्वास व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है
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