बोर खनन है बैन पर आधी रात को हो रहा असली खेल , एजेंटों के भरोसे चल रहा अवैध खनन का खेल…

प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद भी अगर धरातल पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून और जल संरक्षण की नीतियों को चुनौती है। भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर को देखते हुए जिला कलेक्टर द्वारा बोरिंग खनन पर लगाए गए प्रतिबंध पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। क्षेत्र में प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए आधी रात के अंधेरे में धड़ल्ले से अवैध बोरिंग का काम जारी है। ताजा मामला तहसील मुख्यालय से कुछ किलोमीटर की दुरी का है, जहाँ रात के सन्नाटे में भारी मशीनों से खनन किया गया।
*एजेंटों का मायाजाल: “पैसे दो, परमिशन हम दिलाएंगे”*
हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, खनन माफियाओं के सक्रिय एजेंट मोटी रकम लेकर ‘सेटिंग’ का भरोसा देते हैं। और ग्रामीण को पता भी नहीं चलता परमिशन मिला या नहीं और बोर खनन हो जाता है। कर्मचारियों का दावा है कि पैसा फेंकने पर रातों-रात कागजी खानापूर्ति या फिर प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का इंतजाम ये एजेंट ही करते हैं।
कलेक्टर के आदेश की अवहेलना
गौरतलब है कि कलेक्टर ने बढ़ती गर्मी और गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए विशेष परिस्थितियों को छोड़कर नए बोर खनन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इसके बावजूद एजेंटों के माध्यम से हो रहा यह ‘खेल’ प्रशासन की साख पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार विभाग इन अवैध मशीनों और सक्रिय एजेंटों पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर रात के अंधेरे में इसी तरह धरती का सीना चीरा जाता रहेगा।
“इस सम्बन्ध में एसडीएम से बात करने पर उन्होंने बताया की कुछ आवेदन पर नियमअनुसार जांच करके परमिशन दिया गया है वही सवाल यह खड़ा होता है कि जिस खनन के परमिशन की ग्रामीण को ही जानकारी नहीं क्या उस खनन का परमिशन लिया गया होगा“




