धरमजयगढ़ के रूपुँगा में 60 से अधिक पेड़ों का गाजर-मूली के तरह कटाई, पर्यावरण संरक्षण के दावे यहां फेल?
धरमजयगढ़ क्षेत्र के रूपुँगा ग्राम में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला एक जागरूक शिक्षक के सतर्कता से सामने आया है। ग्रामीणों के बताए अनुसार गांव में लगभग 4 एकड़ भूमि पर 60 -70 से अधिक पेड़ों को गाजर-मूली की तरह काट दिया गया है। वही कटे हुए पेड़ों को हटाने और खेत बनाने के लिए जेसीबी मशीन चलाने की भी तैयार कर लीं गई थी जिसके बाद मामला मिडिया में आने के बाद उक्त ज़मीन मालिक अपना हाथ पीछे खींचते हुए पल्ला झाड़ने लगा। अफवाह यह भी हैं कि ज़मीन मालिक अपने रिस्तेदारो के पर्यावरण मंत्री से जान पहचान होने का फायदा उठाते हुए इन पेड़ों की बली चढ़ा दिया हैं और दर्जनों पेड़ों का क़त्ल कर दिया गया हैं।
*जमीन मालिक के दावे से बढ़ा विवाद, शिकायत हुई या नहीं?*
जानकारी के अनुसार जिस भूमि पर कटाई हुई है उसका मालिक तिलकराम पटेल, निवासी जोबितराई (रायगढ़) की बताया जा रहा है। वहीं सूत्रों का कहना है कि अब यह दावा किया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई किसी अन्य व्यक्ति जिसका नाम सम्पत राठिया बताया जा रहा उसके द्वारा की गई है। जब ज़मीन मालिक कोई और तो दर्जनों पेड़ कोई और क्यों काटेगा। लेकिन यदि वास्तव में किसी दूसरे व्यक्ति ने जमीन पर घुसकर पेड़ काटे हैं तो क्या इसकी शिकायत पुलिस या संबंधित विभाग में दर्ज कराई गई? यदि शिकायत नहीं हुई तो इसका मतलब ज़मीन मालिक के कहने पर पेड़ों की कटाई हुई होंगी। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से बचने के लिए अब जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश की जा रही है।

*पर्यावरण मंत्री के गृह जिले में पर्यावरण संरक्षण पर उठे सवाल*
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मामला प्रदेश के पर्यावरण मंत्री के गृह जिले रायगढ़ का है। एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाती है, पर्यावरण संरक्षण के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम दर्जनों पेड़ों की कटाई हो जाती है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि पर्यावरण मंत्री के जिले में ही पेड़ों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है तो फिर पर्यावरण बचाने के दावे कितने प्रभावी हैं। पूरे मामले ने जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सरकार एक पेड़ मा के नाम लगा रही वही कुछ लोंग अपने फायदे के लिए पेड़ों को गाजर-मूली की तरह काट दे रहें हैं।
*एसडीएम करेंगे सख्त कार्रवाई या फिर नोटिस तक सिमट जाएगा मामला?*

अब निगाहें राजस्व विभाग और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। धरमजयगढ़ में कई मामले हैं जिसमें FIR के लिए आदेश तक जारी हो जाता हैं पर महीनों बाद भी FIR नहीं होता हैं। वही इस मामले में क्या प्रशासन मौके पर जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा या फिर मामला केवल नोटिस और कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा? ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पेड़ों की कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि इतने बड़े स्तर पर हुई कटाई के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है तो यह पर्यावरण संरक्षण के दावों पर बड़ा सवाल होगा।

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