ड्रोन सर्वे पर फिर हुआ विरोध, दुर्गापुर-शाहपुर व अन्य के ग्रामीण और secl कर्मचारी के अम्बेटिकरा मंदिर में बैठक, क्या निर्णय हुआ देखे वीडियो
SECL प्रभावित क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच अंबेटिकरा मंदिर परिसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें Secl प्रभावित क्षेत्र के लोगों का आज कंपनी के कर्मचारियों के साथ बैठक अम्बेटिकरा मंदिर में हुई जिसमें ग्रामीणों का जमकर विरोध देखने को मिला हैं। बैठक में कई किसानों में मुआवजा कि राशि को लेकर असमंजस बना था वही कई किसान नें कहा कि वर्तमान बाजार मूल्य का 4 गुना अगर दिया जाता हैं और उसके साथ पूनरवास और नौकरी दिया जा रहा तब एक बार सहमति को स्थिति बन सकती हैं। तो कई किसानों नें कहा की हम हर साल खेती कर लाखों रूपये कमा लें रहें तब ज़मीन कंपनी को देकर हमारा क्या फायदा वही कई किसान तो यह भी कह रहें थे की सरकार मूल्यांकन की राशि परिवर्तन करे। अंत तक कोई सहमति नहीं बन पाई जिस कारण बैठक के बीच ही कई ग्रामीण उठकर चले गए।
जमीन देने के सवाल पर किसानों ने जताई नाराजगी
बैठक में कई किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वे अपनी कृषि भूमि कंपनी को देने के पक्ष में नहीं हैं। किसानों का कहना था कि जमीन ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है।
बाजार मूल्य का 4 गुना मुआवजा और नौकरी की मांग
एक किसान ने कहा कि यदि सरकार वर्तमान बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा, उचित पुनर्वास और परिवार के सदस्य को स्थायी नौकरी देती है, तभी जमीन देने पर सहमति बनने की स्थिति बन सकती है।
“खेती से हर साल लाखों की कमाई, जमीन क्यों छोड़ें?
“कई किसानों ने कहा कि वे अपनी जमीन पर खेती कर हर वर्ष लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। ऐसे में एकमुश्त मुआवजा लेकर जमीन छोड़ना उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
मुआवजा राशि को लेकर बना असमंजस
बैठक में कई ग्रामीणों ने बताया कि भूमि के मूल्यांकन और मिलने वाले मुआवजे को लेकर अभी भी स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसी वजह से प्रभावित किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सरकार से मूल्यांकन नीति बदलने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार वर्तमान भूमि मूल्यांकन की दरों में बदलाव करे और बाजार की वास्तविक कीमत के आधार पर मुआवजा तय किया जाए, ताकि किसानों के साथ न्याय हो सके।
बिना सहमति भूमि अधिग्रहण का विरोध
बैठक में कई किसानों ने कहा कि जब तक उनकी सभी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं होंगे। ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। तबतक ड्रोन सर्वे करने को मना किया ।
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