शर्मनाक तस्वीर! कलेक्टर साहब, एक पुल की कीमत कितनी? नदी पार करके स्कूल जाते छात्रों के हित में पुल बनाने में क्या परेशानी….
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत क्रोंधा से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां की स्कूली छात्राएं स्कूल ड्रेस पहनकर उफनती नदी के बीच से पैदल गुजरकर खड़गांव पढ़ने जाने को मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार वीडियो कुछ महीने पुराना है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। नदी के इस पार छात्र-छात्राएं अपनी साइकिल खड़ी कर देते हैं और फिर पैदल नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं।

बारिश के मौसम में यह सफर हर दिन जानलेवा साबित हो सकता है। भले वीडियो में नदी पार करती छात्राएं दिख रही वो कुछ महीनों पुराना हैं पर आज भी हालात तो वही बने हुए हैं। कुछ दिन के सूखे में तो जल स्तर घट गया पर कुछ दिन पहले बरसात की शुरुआत हुई तब स्थिति वही थी और आगे लगातार होने वाले बारिश में भी स्थिति वही होंगी। एक तरफ बेटी पढ़ाओ और शिक्षा जैसे बातों पर तो सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती हैं पर दूसरी तरफ देखा जाए तो उनके पास पुल बनाने को पैसे नहीं? यह किसकी लापरवाही हैं जो इतनी बड़ी समस्या सरकार तक नहीं पहुंच रही।
स्कूल ड्रेस बचाने के लिए अलग कपड़े लेकर चलती हैं छात्राएं, तेज बहाव में कई दिन छूट जाती है पढ़ाई
छात्राओं ने बताया कि नदी पार करते समय स्कूल ड्रेस भीग जाती है, इसलिए कई लड़कियां अपने साथ अलग कपड़े लेकर आती हैं ताकि नदी पार करने के बाद स्कूल ड्रेस बदल सकें। जब नदी में पानी ज्यादा होता है तो छात्र-छात्राएं स्कूल ही नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित होती है। शिक्षा के अधिकार की बात करने वाले सिस्टम के सामने यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
पुल की मांग वर्षों से अधूरी, कलेक्टर से लगाई गुहार
ग्रामीणों और स्कूली छात्रों ने जिला प्रशासन एवं कलेक्टर से नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पुल बन जाए तो सैकड़ों विद्यार्थियों और ग्रामीणों को हर साल बारिश में जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं करनी पड़ेगी। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है? अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालते हैं या फिर छात्र-छात्राओं की जिंदगी यूं ही खतरे में डालकर शिक्षा का सफर जारी रहेगा।
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