पुरुँगा क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल, धनबाद में धरती धसी कई लोग बेघर….

धनबाद के बाघमारा जैसा भू-धंसान कभी भी बन सकता है बड़ी त्रासदी
झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा स्थित टांडाबाड़ी में हाल ही में हुए भीषण भू-धंसान ने पूरे कोयलांचल क्षेत्र में डर का माहौल पैदा कर दिया है। तेज आवाज के साथ जमीन फटने से 7–8 घर जमींदोज हो गए और दर्जनों परिवार बेघर हो गए। इसी तरह की घटनाओं को देखते हुए अब धरमजयगढ़ के पुरुँगा क्षेत्र में भी लोंग चिंता में पड़ गए है, जहां भूमिगत कोयला खदान की प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता है। ग्रामीणों के अनुसार यहां भी भूमिगत कोयला खदान के कारण ज़मीन खोखली होंगी और ऐसी घटना घट सकती है।
⚠️ पुरुँगा के ग्रामीणों में दहशत, भविष्य को लेकर चिंता
पुरुँगा क्षेत्र में Adani Group के मेसर्स Ambuja Cements के लिए कोयला खदान प्रस्तावित है, यह स्थानीय लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर कोयला खनन शुरू होता है, तो इलाके की जमीन खोखली हो सकती है, जिससे भविष्य में बाघमारा जैसी घटनाएं यहां भी देखने को मिल सकती हैं। लोग अपने घर, जमीन और जान-माल की सुरक्षा को लेकर भयभीत हैं।

🏚️ अवैध उत्खनन और लापरवाही बना बड़ा कारण
धनबाद के बाघमारा में हुई घटना के पीछे अवैध कोयला उत्खनन को मुख्य वजह माना जा रहा है। इसी तरह, कोयलांचल क्षेत्रों—बाघमारा, झरिया और निरसा—में लंबे समय से अवैध खनन जारी है, जिससे जमीन अंदर से खोखली हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन, और संबंधित कंपनियों की लापरवाही के कारण यह खतरनाक स्थिति बनी हुई है। पुरुँगा के ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यहां भी कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। वहा के लोगों नें बीसीसीएल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह उनकी पुस्तैनी जमीन थी और वे कई पीढ़ियों से यहां रहते आ रहें थे, लेकिन बीसीसीएल ने कोयला उत्खनन कर उनकी जमीन को खोखला कर दिया और अब उन्हें मौत के मुंह में छोड़ दिया गया है। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश का माहौल है




