धरमजयगढ़ में ‘गौ-तस्करी योद्धा’ हुए मौन! आखिर अचानक क्यों शांत पड़ गया आंदोलन, लोग पूछ रहे—’मैनेजमेंट’ या मजबूरी?

धरमजयगढ़ में पिछले कुछ समय तक पिकअप वाहनों में गौवंश परिवहन को लेकर लगातार हंगामा करने वाला संगठन पिछले करीब दो सप्ताह से पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई दे रहा है। जो युवा हर परिवहन को गौ-तस्करी बताकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाते थे, वे अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। इस अचानक आई खामोशी को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं कुछ लोंग तों यह भी कह रहें की सब मामला सेट हो गया हैं अब……?
*लोग पूछ रहे सवाल—’जब पर्ची पर मामला सामने आया, अब आवाज क्यों नहीं उठी?’*
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले तो पर्ची और दस्तावेजों के आधार पर भी तस्करी के आरोप लगाए जाते थे, लेकिन जब असल में कुछ दिनों पहले तस्करी पर कार्यवाही हुई जिसमें उक्त लोगों के पास खरीदी बिक्री पर्चा भी मौजूद था जो पर्चा के आड़ में तस्करी की जा रही थी उसके बाद से चेहरे पूरी तरह शांत हो गए। अब लोगों के बीच यह चर्चा है कि आखिर इस चुप्पी की वजह क्या है? क्या मामला ठंडा पड़ गया या फिर कोई और कारण है? कई लोंग तों यह भी कह रहें की यह सब कार्य एक स्तर या यू कहे तों आकर्षक अपनी ओर खींचने का तरीका था जो सफल रहा अब उसका फायदा मिल रहा होगा। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
*शुक्रवार पर टिकी निगाहें, फिर दिखेगी सक्रियता या जारी रहेगी चुप्पी?*
शुक्रवार होने के कारण लोगों की निगाहें एक बार फिर इस संगठन की गतिविधियों पर टिकी हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या आज फिर गौ-तस्करी के मामलों को लेकर कोई अभियान या विरोध देखने को मिलेगा, या पिछले दो सप्ताह की तरह सन्नाटा ही बना रहेगा। फिलहाल संगठन की ओर से इस चुप्पी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे अटकलों का दौर और तेज हो गया है।
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