गौ-तस्करी का धरमजयगढ़ में बड़ा खेल, जीतेन्द्र नें बेचा किसुन नें खरीदा पकड़ाया कोई और, क्या असली मालिक तक पहुंचेगा कानून का हाथ….?

धरमजयगढ़ पुलिस ने युवा संगठन के प्रदीप बिस्वास, समय अग्रवाल, प्रतीक मल्लिक व अन्य सुचना के आधार पर गौवंश तस्करी पर बड़ी कार्यवाही की हैं। लेकिन इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या पुलिस केवल गौवंश हांकने वालों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगी, या फिर उन लोगों तक भी पहुंचेगी जिन्होंने गौवंश की खरीदी-बिक्री की और पूरे खेल को संचालित किया?
अगर इस मामले में रायगढ़ के एसपी संज्ञान लेकर गिरफ्त में आए लोगों से पूछताछ कर लेंगे तों ऐसे ऐसे बातें सामने आएगी मानों तहलका मच जाएगा। क्यूंकि आज जिस मामले पर कार्यवाही हो रही वो कई दिनों से संरक्षण में चल रहा था। पर आज जो बातें सामने आई उसमें पुलिस को भी कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त सबूत दे दिए। बतादे की गौवंश की खरीदी जीतेन्द्र से हुई और खरीददार के रूप में किशुन का नाम सामने आ रहा है। वही ज़ब यह कार्यवाही हो रही थी तब इससे जुड़े कई लोंग उक्त घटनास्थल के चककर लगा रहें थे। पुलिस कड़ाई से पूछताछ करें यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं तो फिर कार्रवाई केवल मजदूरी करने वाले या हांकने वालों तक सीमित क्यों रहे?
असली मास्टरमाइंड कौन? हांकने वाले या खरीददार-विक्रेता?

स्थानीय लोगों का कहना है कि गौवंश को सड़क पर हांकने वाले लोग इस पूरी श्रृंखला की अंतिम कड़ी होते हैं। असली सवाल उन लोगों पर है जो खरीद-बिक्री करते हैं, सौदे तय करते हैं और पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं। यदि कोई व्यक्ति गौवंश खरीदता है तो स्वाभाविक रूप से उसका उद्देश्य भी जांच का विषय होना चाहिए। आखिर गौवंश कहां से आया, किसने बेचा, किसने खरीदा और आगे कहां भेजा जाना था? इन सवालों के जवाब बिना पूरे मामले की तह तक पहुंचना संभव नहीं है।
पर्ची की आड़ में बड़ा खेल चलता रहा?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि आज पर्ची होने के बावजूद कार्रवाई की जा रही है, तो फिर इतने महीनों से पर्चियों के सहारे चल रहे मामलों में पुलिस और प्रशासन की सख्ती कहां थी? क्षेत्र में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि पर्ची की आड़ में गौवंश का परिवहन और खरीद-बिक्री होती रही है। यदि वर्तमान कार्रवाई सही है तो फिर पुराने मामलों की भी समीक्षा होनी चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि छोटे लोगों पर कार्रवाई कर बड़े चेहरे हमेशा बचते रहे हों?
एसपी साहब अगर सख्ती करें तो खुल सकता है बड़ा नेटवर्क

धरमजयगढ़ से लेकर चरखापारा और भैसमा तक इस मामले के तार जुड़े होने की चर्चाएं आम हैं। यदि पुलिस अधीक्षक स्वयं इस मामले की गहन जांच कराएं और और इन हाकने वाले लोगों से ही कड़ाई से पूछताछ हो, तो एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो जाएगा। क्षेत्र की जनता अब यह देखना चाहती है कि कार्रवाई सिर्फ गौवंश हांकने वालों तक सीमित रहती है या फिर कानून की पहुंच उन लोगों तक भी जाती है जो पर्दे के पीछे बैठकर पूरा खेल संचालित करते हैं। क्योंकि अगर असली खिलाड़ियों पर हाथ नहीं डाला गया, तो यह कार्रवाई भी कई पुराने मामलों की तरह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
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