धरमजयगढ़ को जिला बनाने को लेकर ज्ञापन सौपने की तैयारी, धरमजयगढ़ का दर्द: कभी रियासत थे, आज जिला बनने को तरस रहे…

धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक रियासत ‘उदयपुर स्टेट’ के नाम से पहचान रखने वाले धरमजयगढ़ को जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जो क्षेत्र कभी प्रशासन और न्याय व्यवस्था का केंद्र हुआ करता था, वह आज भी जिला मुख्यालय का दर्जा पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रदेश में जब-जब नए जिलों के गठन की चर्चा हुई, तब-तब धरमजयगढ़ की उम्मीदें भी जगीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही हाथ लगा। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आदिवासी क्षेत्र में सुविधाओं की कमी बना बड़ा मुद्दा
धरमजयगढ़ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, लेकिन आज भी यहां के लोगों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए वर्तमान जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, उच्च शिक्षा संस्थानों, रोजगार के अवसरों और मजबूत सड़क व्यवस्था की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला बनने से प्रशासन आम लोगों के करीब आएगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। युवाओं का पलायन, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब जनआंदोलन का विषय बनता जा रहा है।
‘मोर मांग–मोर अधिकार’ के नारे के साथ आंदोलन की तैयारी
सर्व आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिदार ने बताया कि क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर जल्द ही एसडीएम कार्यालय में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस आंदोलन में केवल जिला निर्माण की मांग ही नहीं, बल्कि जर्जर सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल रहेंगे। “मोर मांग–मोर अधिकार” के नारे के साथ क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी समाज एकजुट होने लगे हैं। अब लोगों की नजर सरकार के फैसले पर टिकी है कि आखिर ‘उदयपुर स्टेट’ को उसका लंबे समय से प्रतीक्षित अधिकार कब मिलेगा।
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