धरमजयगढ़ मीना बाजार: पिछले साल 11 नियम, इस साल सिर्फ 5… आखिर कौन निगल गया 6 शर्तें?

धरमजयगढ़ में संचालित मीना बाजार को मिली प्रशासनिक अनुमति अब सवालों के घेरे में है। वर्ष 2025 में जहां अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जारी अनुमति में 11 महत्वपूर्ण शर्तें शामिल थीं, वहीं वर्ष 2026 में जारी अनुमति पत्र में केवल 5 शर्तें ही नजर आ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां बदल गईं कि आधे से अधिक नियमों को अनुमति पत्र से गायब कर दिया गया। क्या सुरक्षा और जनहित से जुड़े नियम अब जरूरी नहीं रहे, या फिर किसी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को हल्का किया गया?
क्या सिर्फ कागजों में दी गई अनुमति, जमीनी जांच हुई या नहीं?

प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या अनुमति जारी करने से पहले अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया? क्या यह जांच की गई कि मीना बाजार में अग्निशमन व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा, आपातकालीन निकासी मार्ग, भीड़ नियंत्रण और अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं? यदि बिना पर्याप्त जांच के अनुमति जारी की गई है तो यह सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जाएगा। सवाल यह भी है कि क्या अधिकारी केवल फाइलों में अनुमति देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहे हैं?
जवाब दे प्रशासन: नियम क्यों घटाए और किसके कहने पर?
धरमजयगढ़ की जनता अब प्रशासन से स्पष्ट जवाब चाहती है। पिछले वर्ष जिन 11 शर्तों को आवश्यक माना गया था, उनमें से 6 शर्तें इस वर्ष क्यों गायब हैं? क्या इन नियमों को हटाने के पीछे कोई वैध कारण है या फिर पूरा मामला जांच का विषय है? यदि नियमों में कटौती की गई है तो उसका लिखित आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अन्यथा यह संदेह और गहरा होगा कि कहीं जनसुरक्षा से समझौता कर मीना बाजार संचालन को खुली छूट तो नहीं दी जा रही है।जनहित से जुड़ा सवाल है—आखिर नियमों में कटौती क्यों हुई और इसकी जवाबदेही कौन लेगा?
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