धरमजयगढ़ में कटहल बना मुसीबत, पके कटहल को नहीं दफनाया तो होगा नुकसान

धरमजयगढ़ वन मंडल में इन दिनों हाथियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। जिस कटहल के पकने का लोग बेसब्री से इंतजार करते थे, अब वही ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है। कटहल की तेज खुशबू से आकर्षित होकर हाथी गांवों की ओर पहुंच रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि कई ग्रामीण हाथियों को गांव से दूर रखने के लिए कटहल को तोड़कर जमीन में दफनाने तक को मजबूर हैं। वन विभाग के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्तमान में 100 से अधिक हाथी विचरण कर रहे हैं और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए DFO जीतेन्द्र उपाध्यय के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा जिसमें उन्हें सफलता भी मिल रहा हैं ।
कई गांवों में दहशत, फसल और मकानों को नुकसान
धरमजयगढ़ वन मंडल के तालगांव, अलोला, लिप्ती, पखनाकोट, प्रेमनगर, क्रोंधा, खम्हार सहित कई हाथी प्रभावित गांवों में ग्रामीण हर रात सतर्क रहकर समय बिता रहे हैं। जंगल से निकलकर हाथियों के दल खेतों में पहुंच रहे हैं, जहां धान सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई स्थानों पर मकानों को भी क्षति पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। लगातार बढ़ रही हाथियों की गतिविधियों के चलते ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
वन विभाग की अपील—कटहल को खुले में न छोड़ें, हाथियों से दूरी बनाए रखें
वन विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों को समझाइश दी जा रही है कि हाथियों के नजदीक न जाएं, उन्हें किसी भी तरह से उकसाने का प्रयास न करें और कटहल जैसे फलों को खुले में छोड़ने के बजाय जमीन में दफना दें या पानी में बहा दें, ताकि उनकी गंध हाथियों को गांव की ओर आकर्षित न कर सके। डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों से अपील है कि हाथियों की सूचना तत्काल वन विभाग को दें और विभाग के निर्देशों का पालन करें।
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