प्रभावित क्षेत्र में खरीदी-बिक्री पर 2016 में लगा था बैन, फिर भी जारी रही जमीन की रजिस्ट्री! रविंद्र राय ने खोली पूरी पोल
धरमजयगढ़। प्रभावित क्षेत्र में जमीन की खरीदी-बिक्री को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में प्रभावित क्षेत्र में जमीन की खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध (बैन) लगाया गया था, बावजूद इसके बाद के वर्षों में जमीन की खरीदी-बिक्री और रजिस्ट्री किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।और आज उसी ज़मीन पर निर्माण भी देखने को मिल रहा हैं।
मामले को लेकर रविंद्र राय ने कई अहम सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रभावित क्षेत्र में वर्ष 2016 से खरीदी-बिक्री पर रोक थी, तो इसके बाद जमीन के लेन-देन कैसे होते रहे? यदि प्रतिबंध लागू था, तो संबंधित जमीनों की रजिस्ट्री किस आधार पर हुई और इसकी अनुमति किस स्तर से मिली?
बैन के बावजूद रजिस्ट्री कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2016 में लगाए गए प्रतिबंध के बाद भी यदि जमीनों की खरीदी-बिक्री हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित दस्तावेजों की जांच किए बिना रजिस्ट्री की गई या फिर नियमों की अनदेखी हुई? रविंद्र राय के खुलासे के बाद अब प्रभावित क्षेत्र में हुए जमीन के पुराने दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों की जांच की मांग उठ सकती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल जमीन की खरीदी-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा।अब देखना होगा कि 2016 के बैन के बाद हुई खरीदी-बिक्री की जांच कब शुरू होती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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