धरमजयगढ़ नगर पंचायत में पेट्रोल-डीजल की पर्चियों पर उठे सवाल, जानकारी ना देना बढ़ा रहा संदेह….

धरमजयगढ़। नगर पंचायत धरमजयगढ़ में बीते वर्षों के दौरान पेट्रोल-डीजल क्रय और उससे जुड़ी पर्चियों को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के उद्देश्य से एक व्यक्ति RTI के माध्यम से जानकारी मांगी गई, लेकिन आरोप है कि लंबे समय से जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय आवेदक को इधर-उधर घुमाया जा रहा है।
“जिम्मेदारी हेमंत साव की थी” कहकर कब तक टलेगा जवाब?
RTI के माध्यम से पेट्रोल-डीजल क्रय की पर्चिया से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर संबंधित कर्मचारियों की ओर से कथित तौर पर यह कहा की उक्त डीजल पेट्रोल खरीदी का काम हेमंत साव द्वारा संभाला जा रहा था और उनके पास ही क्रय की समस्त जानकारी हैं और ज़ब विभाग के कर्मचारी उनको जानकारी देने आवेदक के सामने कह दे रहें तब लगातार हेमंत साव द्वारा ही “आज-कल” कहकर मामला टाला जा रहा है। ऐसे में अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उन पर्चियों और रिकॉर्ड में ऐसा क्या है, जिसकी जानकारी देने में इतनी देरी हो रही है?
जाली दस्तखत और खराब वाहनों में ईंधन खपत की सूचना ने बढ़ाई शंका
RTI लगाए जाने की वजह भी बेहद गंभीर बताई जा रही है। आवेदक को कथित रूप से ऐसी जानकारी मिली थी कि जिस व्यक्ति के पास पेट्रोल-डीजल की पर्चियों की जिम्मेदारी थी, उसके द्वारा CMO के कथित जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर पेट्रोल-डीजल खरीदे जाने की बात सामने आई थी। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे वाहनों में भी ईंधन के इस्तेमाल की जानकारी होने की बात कही जा रही है, जो उस समय खराब हालत में बताए जाते थे। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला महज पर्चियों की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासकीय राशि और ईंधन के उपयोग की गंभीर जांच की जरूरत पड़ सकती है।
रिकॉर्ड सामने आए तो दूध का दूध, पानी का पानी
अब सवाल नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से है—क्या पेट्रोल-डीजल की पर्चियों का पूरा रिकॉर्ड जांच के लिए सामने आएगा? क्या कथित हस्ताक्षरों की जांच होगी? खराब वाहनों में दर्ज ईंधन खपत का सत्यापन किया जाएगा? और सबसे महत्वपूर्ण, RTI आवेदक को मांगी गई जानकारी आखिर कब मिलेगी?यदि रिकॉर्ड साफ है तो उसे सामने रखने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी है, तो उसे दबाने या टालने के बजाय जिम्मेदारी तय कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की आवश्यकता होगी। फिलहाल इन अश्वासन के कारण आवेदक को देरी तो बहोत हुई वही अब आवेदक अपील की तैयारी कर रहा।
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