राजू यादव और फुलेश्वरी पर FIR दर्ज, कलेक्टर के निर्देश पर हुआ FIR…सरकारी जमीन निजी के नाम करने में कौन कर्मचारी शामिल—कही से भी जल्द ढूंढ निकालेंगे थाना प्रभारी

धरमजयगढ़। सरकारी जमीन के फर्जीवाड़े का मामला आखिरकार FIR तक पहुंच ही गया। करीब दो महीने से किसी कारणवश FIR दर्ज नहीं हो पा रही थी, जिसके बाद मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल FIR दर्ज करने के लिए धरमजयगढ़ के संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। इसके बाद धरमजयगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फुलेश्वरी पति मानिकदास और राजू यादव पिता गुरुवार यादव के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। यानी मामला जो करीब दो महीने से फाइलों में घूम रहा था, वह आखिरकार पुलिस की डायरी तक पहुंच गया। सरकारी जमीन की खरीदी बिक्री दूर मुख्य मुद्दा यह हैं कि सरकारी जमीन निजी व्यक्ति के नाम कैसे आया। किसनें फर्जी दस्तावेज बनाएं, किसने सत्यापन किया, किसने पंचनामा बनाया, किसने रजिस्ट्री की और किसने नामांतरण किया। इससे साफ जाहिर होता हैं कि इसमें सिर्फ 2 लोंग नहीं और कई चेहरे शामिल हैं।
सरकारी जमीन से निजी नाम और फिर खरीद-बिक्री तक पहुंचा मामला!

FIR में ग्राम अमलीटिकरा की शासकीय भूमि से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख है। कि सरकारी जमीन को निजी नाम पर दर्ज कराया गया और बाद में उसकी खरीद-बिक्री की गई। पुलिस ने मामले में धारा 318(4) और 3(5) BNS के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है। अब जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे—सरकारी जमीन निजी नाम पर कैसे पहुंची? रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुआ? जमीन की खरीद-बिक्री कैसे हुई? और इस पूरे खेल में और कौन-कौन चेहरे शामिल हैं? मतलब मामला सिर्फ दो नामों की FIR तक सीमित रहेगा या जांच आगे बढ़ते-बढ़ते कहानी में नए किरदार भी सामने आएंगे, यह पुलिस की विवेचना से साफ होगा।
थाना प्रभारी राजेश जांगड़े से नहीं बचेंगे मुजरिम… जल्द करेंगे आरोपियों को गिरफ्तार —अब तलाश शुरू, कानून से आंख-मिचौली कितने दिन?

FIR दर्ज होने के बाद अब सबकी निगाहें धरमजयगढ़ थाना प्रभारी राजेश जांगड़े और पुलिस टीम की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। धरमजयगढ़ पुलिस अबतक बड़े बड़े मामलों में अन्य राज्यों से भी मुजरिमो को खोज ला रही ऐसे में यह मामला उनके लिए आम बात हैं।
लोगो में चर्चा हैं की थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस सराहनीय कार्य कर रही ऐसे में पुलिस राजू यादव और फुलेश्वरी व अन्य को पाताल से भी ढूंढ़ निकलेगी।
कहां हैं दोनों? पुलिस तक कब पहुंचेंगे? और क्या जांच के दौरान इस जमीन प्रकरण से जुड़े और नाम सामने आएंगे? फिलहाल FIR दर्ज हो चुकी है, कलेक्टर का निर्देश हो चुका है और अब गेंद धरमजयगढ़ पुलिस के पाले में है। सरकारी जमीन के इस फर्जीवाड़े में अब फाइल नहीं, पुलिस की जांच दौड़ेगी—और अगर आरोपी कहीं छिपे भी हैं तो पुलिस की तलाश उन्हें कानून के सामने लाने तक जारी रह सकती है।
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