धरमजयगढ़ के सचिव का कलेक्टर से शिकायत..विजयनगर से सचिव हटाने पंच पहुँचे रायगढ़..विजयनगर पंचायत में सचिव राज?

धरमजयगढ़। ग्राम पंचायत विजयनगर में पंचायत सचिव भूपदेव राठिया की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पंचायत के पंचों ने लिखित शिकायत के जरिए सचिव पर मनमाने तरीके से पंचायत चलाने, पंचायत कार्यालय बंद रखने और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पंचायत के कामकाज एवं फंड की जानकारी से दूर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।पंचों और ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने चुनकर भेजा है, उन्हें ही पंचायत के फैसलों और खर्चों की जानकारी नहीं दी जा रही। सवाल सीधा है—जब पंचायत जनता की है तो हिसाब-किताब पर कथित तौर पर पर्दा क्यों?
फंड निकासी पर घमासान—‘पैसा निकला तो काम कहां हुआ?’

शिकायत में सीसी रोड, नाली निर्माण, डोढ़ी निर्माण, मंच निर्माण सहित अन्य कार्यों में पंचायत निधि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। पंचों के मुताबिक इन मामलों को लेकर पहले CM हेल्पलाइन 1076 तक शिकायत पहुंच चुकी है और जांच भी हुई है। शिकायत में राशि निकासी से जुड़े तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। साथ ही पंचायत में कंप्यूटर सेट और अन्य उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।अब असली सवाल यही है—सरकारी पैसा निकला तो किस काम पर लगा? काम हुआ तो मौके पर कितना हुआ? भुगतान किसे और किस आधार पर किया गया? और पंचायत प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?
‘एक-एक पैसे का हिसाब दो’—पंचों ने प्रशासन से मांगी कड़ी कार्रवाई
पंचों ने जिला प्रशासन से सचिव भूपदेव राठिया को विजयनगर पंचायत से तत्काल हटाने और उनके कार्यकाल के दौरान पंचायत में हुए सभी कार्यों एवं वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मांग है कि पंचायत के मस्टर रोल, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच हो। साथ ही पंचायत में खरीदे गए उपकरण और सामग्री का भौतिक सत्यापन भी कराया जाए। अब मामला सिर्फ सचिव को हटाने की मांग तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि अगर शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और सरकारी धन का हिसाब कौन देगा?
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