धरमजयगढ़ में सेमल पेड़ों की कटाई का मामला: आरोप है कि रात को बिना परमिशन होता है परिवहन….

धरमजयगढ़ के नीचेपारा स्थित राम मंदिर के पीछे भारी मात्रा में सेमल पेड़ों को डंप करके रखने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़ी संख्या में पेड़ों को काटकर एकत्र किया गया है, जिससे वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। यह क्षेत्र मुख्यालय और वन मंडल कार्यालय से मात्र 2-3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे मामला और भी गंभीर हो जाता है। सूत्रों का दावा है कि कटे हुए सेमल पेड़ों को क्रेन और ट्रकों की मदद से पत्थलगांव का कोई व्यापारी ले जाता है जिसका विभाग से अनुमति नहीं लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिए जाने की बात कही जा रही है, जिससे यह संदेह गहरा रहा है कि यह सिर्फ कटाई नहीं, बल्कि संगठित तस्करी का मामला हो सकता है।
*परमिशन में गड़बड़ी के आरोप*
सबसे बड़ा सवाल अनुमति को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि पेड़ों की कटाई के लिए परमिशन किसी अन्य हल्का पटवारी क्षेत्र से ली जाती है, जबकि वास्तविक कटाई किसी और स्थान पर की जाती है। दो हल्का का सीमाना स्थल होने के कारण यहां असमंजस की स्थिति बनी रहती है पर वर्तमान में कटे हुए पेड़ हल्का नंबर 56 में रखे होने की जानकारी मिल रही है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि हल्का 56 में कटाई की अनुमति ली गई थी या नहीं। इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई और उनका खुले में भंडारण प्रशासन की नजरों से कैसे बचा, यह बड़ा सवाल है। जब यह पूरा मामला वन मंडल और प्रशासनिक मुख्यालय के इतने करीब हो रहा है, तो निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
*रात के अंधेरे में परिवहन का आरोप*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कटे हुए पेड़ों का परिवहन रात के समय किया जाता है, जिससे गतिविधियों को छिपाया जा सके। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि क्या परिवहन के लिए वैध अनुमति ली गई है या बिना अनुमति के ही यह कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। अब यह देखना होगा कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।




