घास मद की ज़मीन पर पट्टा….. कलेक्टर से शिकायत और कानूनी कार्यवाही की तैयारी

धरमजयगढ़ क्षेत्र के हल्का नंबर 10 मिरिगुड़ा में राजस्व अभिलेखों और जमीनी हकीकत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग के अभिलेखों में “घास मत” (सुरक्षित भूमि) के रूप में दर्ज है। लेकिन आरोप है कि कुछ लोगों नें मिलीभगत कर इसी भूमि को “बड़े झाड़ का जंगल” दर्शाकर वनाधिकार पट्टा जारी कर दिया। जिसको लेकर अब शिकायतकर्ता जिला कलेक्टर के पास जाने को तैयार है। वही जिसके नाम पर ज़मीन दर्ज की गई हैं उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही और ज़मीन को शून्य करने के लिए शिकायत किया जा रहा हैं। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मिसल एवं अधिकार अभिलेख में भूमि स्पष्ट रूप से राजस्व विभाग की सुरक्षित भूमि दर्ज है, तब आखिर किस आधार पर खसरा नंबर में एक स्थानीय व्यक्ति दुस्यंत के नाम पर 1.0110 हेक्टेयर भूमि को बड़े झाड़ का जंगल बताते हुए वन पट्टा प्रदान किया गया?
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में दर्ज भूमि की प्रकृति को बदलकर पट्टा वितरण किया गया है, तो यह न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन है बल्कि शासन की भूमि संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने एवं अभिलेखों की सत्यता की जांच कराने के लिए जल्द ही उच्च अधिकारियों को शिकायत सौंपे जाने की तैयारी की जा रही है।




