धरमजयगढ़ कांग्रेस पर सवाल: नगर पंचायत में मुद्दों पर क्यों चुप..!राष्ट्रीय मुद्दों पर अचानक सड़क पर क्यों उतरे कार्यकर्ता..?

धरमजयगढ़ क्षेत्र में वर्षों से विकास कार्यों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण की राशि वापस चली जाने की चर्चा हो, अधूरे निर्माण कार्य हों या फिर लाखों रुपये की लागत वाले कार्यों में गुणवत्ता को लेकर लगाए जा रहे आरोप, इन सभी मुद्दों पर जनता लगातार जवाब मांगती रही है। क्षेत्र के कई हिस्सों में विकास की रफ्तार धीमी होने और भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का बड़ा आंदोलन अब तक देखने को नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्थानीय समस्याओं पर मौन और राष्ट्रीय मुद्दों पर आक्रोश की राजनीति आखिर क्यों? अगर ऐसे ही प्रदर्शन हर मुद्दों पर धरमजयगढ़ में किये जाते तो आज नगर का विकास देखने लायक होता। नीट जैसे मुद्दा जिसे गिने चुने कार्यकर्त्ता शायद ही प्रभावित हो रहें होंगे उसके लिए आंदोलन किया जा रहा और धरमजयगढ़ में विपक्ष में बैठे धरमजयगढ़ के मुद्दों के लिए अबतक ऐसा प्रदर्शन नहीं क्यों…?
*जनता पूछ रही- धरमजयगढ़ के विकास के लिए कब होगा संघर्ष?*

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि धरमजयगढ़ के विकास, अधूरे कार्यों, भ्रष्टाचार के आरोपों और जनहित के मुद्दों को लेकर भी इसी तरह आंदोलन किए जाते, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय जनता को मिलता। बस स्टैंड, सड़क, मूलभूत सुविधाओं और विकास योजनाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दे आम नागरिकों को प्रतिदिन प्रभावित करते हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि स्थानीय समस्याओं पर विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रियता दिखाना क्या जनता के वास्तविक हितों से दूरी नहीं दर्शाता?
*क्या गर्म मुद्दों पर राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश?*

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष का काम जनता के हर मुद्दे को उठाना है, लेकिन प्राथमिकता उन समस्याओं को मिलनी चाहिए जिनसे स्थानीय लोग सीधे प्रभावित होते हैं। धरमजयगढ़ के कई अहम मुद्दों पर लंबे समय से आंदोलन नहीं होने के कारण अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या चर्चित और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर सक्रियता केवल राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास है। जनता अब यह जानना चाहती है कि धरमजयगढ़ के विकास और स्थानीय समस्याओं के लिए भी क्या इसी तरह सड़क पर उतरकर संघर्ष किया जाएगा, या फिर स्थानीय मुद्दे केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित रहेंगे।
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