धरमजयगढ़ के इस पंचायत में लगभग 1.50 लाख की रिकवरी… ऑडिट के दौरान खुलासा….

धरमजयगढ़ में मनरेगा कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण जारी है जिसको लेकर संचालक जीतेन्द्र सिंघरोल एवं जनपद सीईओ मदनलाल साहू द्वारा कड़ाई से निर्देश दिया गया है की सामाजिक अंकेछण में लापरवाही नहीं बर्ती जाएगी एवं शासकीय राशि का दुरपयोग किसी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जएगा।इसी कड़ी में ग्रामसभा के दौरान आडिटर मुन्ना यादव द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जी हाजिरी और मजदूरी भुगतान का खुलासा किया गया है। वही ग्रामसभा में हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि आवास निर्माण का काम खुद पति-पत्नी ने मिलकर किया, लेकिन मजदूरी भुगतान के रिकॉर्ड में दूसरे लोगों की हाजिरी दर्ज कर राशि आहरित की गई। इस खुलासे के बाद ग्रामसभा में जमकर हंगामा हुआ और जिम्मेदारों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। बता दें की प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति होने के बाद मनरेगा के तहत जो रोजगार गारंटी की बात कही जाती है उसी के तहत आवास में करीब 90 दिनों का कार्य मजदूरों को करवाया जाता है जिसकी राशि का भुगतान मनरेगा के तहत आवास से अलग होता है। इसी का खुलासा आडिटर मुन्ना यादव ने 10 अक्टूबर को हुए ग्रामसभा में किया और 1 लाख 50 हजार से अधिक की रिकवरी निकाली।
हितग्राहियों ने उठाए सवाल, सरपंच और रोजगार सहायक ने झाड़ा पल्ला
ग्रामसभा के दौरान कई हितग्राहियों ने मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अपनी बात रखी। उनका कहना है कि जब प्रधानमंत्री आवास का निर्माण में उन्होंने खुद कार्य किया, तो फिर उनके आवास के निर्माण कार्य में दूसरे लोगों की हाजिरी कैसे दर्ज हो गई? आखिर किसके निर्देश पर दूसरे लोगों के नाम पर मजदूरी का भुगतान किया गया? मामले में सरपंच और रोजगार सहायक ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए दूसरे लोगों पर आरोप लगाए। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि सरकारी योजना के भुगतान रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
30-40 हितग्राहियों के नाम पर भुगतान का मामला, 1.50 लाख से अधिक की रिकवरी

जानकारी के मुताबिक, करीब 30-40 लोगों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास की मजदूरी के फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। इस मामले में लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि की रिकवरी किया जाना है। ग्रामसभा में संबंधित अधिकारियों के माध्यम से राशि की वसूली किए जाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, पूरे मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हितग्राही खुद आवास निर्माण का काम करने की बात कह रहे हैं, तो उनके आवास के नाम पर दूसरे लोगों की हाजिरी किसने भरी और भुगतान किसके आधार पर किया गया?
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