SECL को लगा खदान खोलने की राह आसान, आदिवासी विरोध ने बिगाड़ा पूरा गणित; दुर्गापुर में पूजा के बाद आर-पार का ऐलान

धरमजयगढ़। दुर्गापुर-शाहपुर प्रस्तावित SECL ओपन कोयला खदान को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब महज आपत्ति तक सीमित नहीं रहा है। प्रभावित ग्रामीण लगातार जमीन, खेती, विस्थापन और भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले भी प्रभावित ग्रामसभाओं और ग्रामीण बैठकों में परियोजना के विरोध की बात सामने आती रही है। SECL को जिस परियोजना की राह आगे बढ़ाने में आसानी नजर आ रही थी, अब वही परियोजना ग्रामीणों की एकजुटता के कारण बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है।जानकारी यह हैं कि SECL अबतक अपने पाले के लोगो को लेकर समर्थन दिखाने कि कोशिश कर रहा था ताकी आसानी से खदान खुल सके पर अब पूरा गणित बिगड़ते दिखाई पड़ रहा हैं।
पूजा-पाठ के बाद जमीन नहीं देने का संकल्प
दुर्गापुर में ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। नारियल, सुपारी और अगरबत्ती अर्पित करने के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि अपनी मातृभूमि की जमीन SECL को नहीं दी जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि जमीन उनके लिए केवल संपत्ति नहीं, बल्कि पूर्वजों की निशानी, खेती, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों का आधार है। ऐसे में सिर्फ मुआवजे की बात से उनकी चिंता खत्म नहीं होगी।
अब SECL के सामने सबसे बड़ी चुनौती, गांव-गांव आंदोलन की तैयारी
अब ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों और टोलों में बैठकें कर आंदोलन को और मजबूत करने का फैसला लिया है। इसके बाद बड़ी आमसभा और रैली की तैयारी की जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को प्रशासन से लेकर सरकार और न्यायालय तक ले जाया जाएगा। पहले भी ग्रामीणों की ओर से ड्रोन सर्वे और भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध सामने आ चुका है।सवाल अब सिर्फ खदान खुलने का नहीं, बल्कि जमीन और भविष्य बचाने का बताया जा रहा है।SECL के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि जिस खदान को कागजों पर आगे बढ़ाना आसान समझा जा रहा था, जमीन पर ग्रामीणों का विरोध उसकी राह में लगातार दीवार खड़ी कर रहा है।अब देखना होगा कि प्रशासन और SECL ग्रामीणों के इस सामूहिक विरोध का समाधान निकालते हैं या दुर्गापुर से उठी आवाज आने वाले दिनों में पूरे प्रभावित क्षेत्र के बड़े आंदोलन में बदलती है।
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