बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ा मौका! धरमजयगढ़ में 4 तालाबों का 10 साल का पट्टा, ऐसे मिलेगा लाभ

धरमजयगढ़। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ ने क्षेत्र के चार तालाबों को मत्स्य पालन के लिए 10 वर्षीय पट्टे पर आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए इच्छुक पात्र मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआ समूहों, महिला स्व-सहायता समूहों और पात्र व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 21 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
इन चार तालाबों का होगा 10 साल के लिए पट्टा
जनपद पंचायत द्वारा जारी इश्तहार के अनुसार नरकालो डेम, जमरगी डेम, कुमरता जलाशय और डोंगाभौना (देउरमार) के बड़खचा मुड़ा तालाब को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दिया जाना है।
1| नरकालो | नरकालो डेम| 30.063 हेक्टेयर
2| जमरगीडी| जमरगी डेम| 12.564 हेक्टेयर
3| कुमरता| कुमरता जलाशय| 44.425 हेक्टेयर
4| डोंगाभौना (देउरमार)| बड़खचा मुड़ा|12.135 हेक्टेयर
चारों जलस्रोतों का कुल क्षेत्रफल 99.187 हेक्टेयर है।
किसे मिलेगी प्राथमिकता?
पट्टा आवंटन में सबसे पहले पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों एवं मछुआ समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद पात्र महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता मिलेगी। मछली पालन में डिप्लोमा, स्नातक या स्नातकोत्तर योग्यता रखने वाले मछुआ व्यक्तियों अथवा बेरोजगार युवाओं को भी प्राथमिकता सूची में स्थान दिया गया है।वहीं, वर्ष 1965 या उसके बाद जलाशय निर्माण के कारण विस्थापित हुए परिवारों को संबंधित जलक्षेत्र में पट्टा देने के लिए प्राथमिकता का प्रावधान रखा गया है। योजना में चयनित हितग्राही की न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूर्ण होना आवश्यक है।
21 सितंबर तक आवेदन, अधूरे आवेदन पर नहीं होगा विचार
जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के इश्तहार के मुताबिक आवेदकों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ 21 सितंबर 2026 तक जनपद पंचायत कार्यालय धरमजयगढ़ में आवेदन जमा करना होगा। पंजीकृत समितियों को पंजीयन प्रमाण पत्र, सदस्यों की सूची, बैंक से कर्ज नहीं होने का प्रमाण पत्र, समिति का प्रस्ताव और ऑडिट रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेज देने होंगे।मछुआ समूहों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी निर्धारित दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। व्यक्तिगत हितग्राहियों को गरीबी रेखा सर्वे प्रमाण पत्र, जाति, निवास और बैंक से कर्ज नहीं होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।जनपद पंचायत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया से स्थानीय मछुआ समूहों, महिला स्व-सहायता समूहों और बेरोजगार युवाओं को मत्स्य पालन के जरिए स्वरोजगार का अवसर मिलने की उम्मीद है। मत्स्य पालन के लिए सरकारी तालाबों को दीर्घकालीन पट्टे पर देना रोजगार और आजीविका बढ़ाने का एक प्रचलित माध्यम है।
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