कलेक्टर से मिलने से पहले धरमजयगढ़ के SECL खदान प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की आपसी बैठक… खदान का खुलकर हुआ विरोध…

धरमजयगढ़ कॉलोनी में आज शाम हुए बैठक में प्रस्तावित SECL ओपन कोयला खदान को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने गंभीर सवाल उठाए। बैठक में विस्थापन, जमीन, खेती, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के भविष्य को लेकर चर्चा हुई। जानकारी सामने आई की 21 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय में बैठक आयोजन किया गया हैं जिसमें प्रभावित क्षेत्र के लोगो से जिला कलेक्टर द्वारा चर्चा किया जाएगा। इसको लेकर ग्रामीण असमंजस में हैं कि वहा जाए या नहीं और अगर जाते हैं उस स्थिति में जिला कलेक्टर से मिल यह माँग रखा जाएगा की प्रशासन एक बार प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों के साथ खुले मंच पर बैठक करें ताकी ग्रामीणों और जिला कलेक्टर से सीधे संवाद कर सके।
SECL की बैठक में जाने के लिए वाहन की व्यवस्था पर उठे सवाल

बैठक में मिली जानकारी के अनुसार एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि प्रस्तावित बैठक में शामिल होने के लिए ग्रामीणों को ले जाने हेतु वाहन की व्यवस्था SECL की ओर से किए जाने की बात सामने आई। इस पर बंग समाज के लोगों ने आपत्ति जताते हुए SECL की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे वाहन को लेने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रभावितों की राय स्वतंत्र रूप से सामने लानी है, तो बैठक में पहुंचने की व्यवस्था भी कंपनी की ओर से क्यों की जा रही है? समाज के लोगों ने वाहन लेने से मना कर यह संदेश दिया कि वे अपनी बात किसी कंपनी के सहयोग या दबाव के बिना प्रशासन के सामने रखना चाहते हैं।
“बैठक प्रभावित गांव में हो, तभी सामने आएगी असली तस्वीर”

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बैठक में ऐसे लोगों की मौजूदगी की चर्चा है, जिन्हें पूर्व में SECL के समर्थन में देखा गया है। ऐसे में वास्तविक प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की आवाज कितनी मजबूती से सामने आएगी, यह बड़ा सवाल है।बंग समाज ने मांग की है कि अगली बैठक किसी कार्यालय या निर्धारित सभाकक्ष के बजाय सीधे प्रभावित गांव में आयोजित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में खुली बैठक होने पर किसान अपनी जमीन, मकान, खेती, रोजगार, विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे बिना झिझक प्रशासन के सामने रख सकेंगे।
जमीन के साथ अस्तित्व का सवाल, कंपनी के सामने ग्रामीणों की दो टूक
ग्रामीणों का कहना है कि बंग समाज के कई परिवार पहले ही विस्थापन का दर्द झेल चुके हैं। ऐसे में दोबारा ओपन कोयला खदान की गतिविधियां शुरू होने की स्थिति में जमीन और खेती के साथ-साथ सामाजिक एवं पारिवारिक अस्तित्व पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने साफ किया कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जा सकती। समाज की मांग है कि प्रशासन कंपनी और प्रभावित ग्रामीणों के बीच केवल औपचारिक बैठक न कराए, बल्कि वास्तविक प्रभावितों को खुलकर बोलने का अवसर दे।बैठक में यह भी मांग उठी कि प्रस्तावित प्रक्रिया को खुले मंच में आयोजित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पहले उनकी जमीन, आजीविका, पुनर्वास, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब मिले, उसके बाद ही परियोजना से जुड़े किसी निर्णय को आगे बढ़ाया जाए।
फिलहाल SECL की ओर से वाहन उपलब्ध कराने और बैठक की प्रक्रिया को लेकर उठे इन सवालों ने प्रस्तावित ओपन कोयला खदान को लेकर ग्रामीणों की चिंता और अविश्वास को और गहरा कर दिया है। अब नजर प्रशासन की अगली बैठक और उसमें प्रभावित ग्रामीणों की भागीदारी पर रहेगी।
धरमजयगढ़ जनपद उपाध्यक्ष के कार्यों से प्रभावित मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री, ओपी चौधरी ने दी बड़ी मंजूरी….




