जनता से अधिकारी-कर्मचारी कैसे बात करते है धरमजयगढ़ आए और देखे मुख्यमंत्री साहब, मुख्यमंत्री साय के आदेश के बाद धरमजयगढ़ की जनता साय से धरमजयगढ़ आने का कर रहें आग्रह…

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आम जनता के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। पर यह आदेश धरातल पर प्रभावी होगा यह धरमजयगढ़ में वर्तमान स्थिति को देखकर आम जनता को यकीन नहीं हो रहा है। क्युकी धरमजयगढ़ में कई विभागों की बात करें तों वहा अधिकारी कर्मचारी तों बात भी करले वही बड़ी बात है। कई जगह ऐसा है जहाँ पर्ची भेजकर जनता को इंतजार करना पड़ता है की कब अधिकारी साहब का मूड अच्छा रहेगा और कब अंदर बुलावा आएगा। नाम ना उजागर करने के शर्त पर एक व्यक्ति नें कहा की हाल ही में उसने एक मामले के सम्बन्ध में किसी अधिकारी को फ़ोन किया पर उधर से जो जवाब आया उस शब्द को सभ्य समाज अपना भी नहीं सकता। इसके अलावा देखा जाए तों जनता कह रही की मुख्यमंत्री साहब आदेश तों कर रहें पर लगातार हो रहें शिविर के कारण कोई अधिकारी कर्मचारी ऑफिस में मिलेगा तब तों जनता अपनी समस्या उनको सुनाएंगे।
हफ्ते में 2 दिन तों मीटिंग का हवाला दें दिया जाता है जिसके बाद अगर विभाग वाले फील्ड पर जाए तों 1 से 2 दिन का समय ऐसे ही निकल जाता है उसके बाद शनिवार और रविवार तों छुट्टी में ही चला जाता है ऐसे में जनता अधिकारी से मिले कब..?
साय नें दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर तैनात अधिकारी ही वास्तव में शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण सीधे तौर पर सरकार की छवि को प्रभावित करता है। ऐसे में साय को मिडिया के माध्यम से बातें ना करके धरातल पर यह कैसे प्रभावशील होगा उसपर ध्यान देना चाइए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना अधिकारियों का पहला कर्तव्य है। संवाद तभी सार्थक माना जाएगा जब उसमें संवेदना हो और समस्याओं के समाधान की स्पष्ट नीयत हो।

*’सुशासन तिहार’ के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे अधिकारियों के व्यवहार का परीक्षण*
छत्तीसगढ़ में 1 मई से 10 जून 2026 तक चलने वाले “सुशासन तिहार” के माध्यम से जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस अभियान के तहत पंचायत और वार्ड स्तर पर विशेष समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की है कि वे इस दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का आकस्मिक (औचक) निरीक्षण करेंगे। वे न केवल विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे, बल्कि अधिकारियों की संवेदनशीलता और उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित छत्तीसगढ़ के सपने को साकार करने के लिए प्रशासन को हर नागरिक के लिए सुलभ, जवाबदेह और सम्मानजनक बनना अनिवार्य है।




