ओपन परीक्षा में हुआ था जमकर नक़ल, अब इस मामले में रायगढ़ कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यवाही करने से पीछे हट रहें…?

जमकर हुआ नक़ल फिर भी कार्रवाई शून्य, बच्चों नें कहा पैसे लेकर करवाया गया नकल, मुन्नाभाई बन दिया परीक्षा — शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
धरमजयगढ़ के छाल क्षेत्र से कुछ किलोमीटर दुरी पर सीमाना से सटे बर्रा जो खरसिया क्षेत्र के अंतर्गत आता है वहा शिक्षा जगत को हिलाकर रख देने वाले परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, बर्रा के परीक्षा केंद्र पर कई अभ्यर्थी दूसरे के एडमिट कार्ड पर परीक्षा देते हुए पकड़े गए थे और अन्य कई परीक्षार्थियों से 5000,8000,12000 लेकर नकल करवाया गया जिसकी जानकारी खुद परीक्षार्थियों नें दी । यह कोई सामान्य अनियमितता नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया बड़ा घोटाला है।
हैरानी की बात यह है कि इस मामले की पुष्टि खुद खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई थी। यानी जिम्मेदार अधिकारी को पूरी जानकारी थी कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। इसके बावजूद अब तक न कोई एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी पर कार्रवाई की गई। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि या तो प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा, या फिर जानबूझकर इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उस समय अधिकारी नें क्या कहा था सुनिए 👇
*कार्रवाई में देरी या जानबूझकर चुप्पी? उठ रहे तीखे सवाल*
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जब अधिकारी स्वयं इस फर्जीवाड़े को स्वीकार कर चुके हैं, तो फिर कार्रवाई करने में आखिर देरी क्यों हो रही है? क्या विभाग किसी दबाव में काम कर रहा है, या फिर कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है? स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि प्रशासन इस मामले को धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डालने की रणनीति पर काम कर रहा है। यदि ऐसा है, तो यह न केवल कानून के साथ खिलवाड़ है, बल्कि उन ईमानदार छात्रों के साथ भी अन्याय है, जिन्होंने मेहनत के दम पर परीक्षा दी।कार्रवाई न होने से यह भी संदेश जा रहा है कि अगर कोई परीक्षा में फर्जीवाड़ा करता है, तो उसे बचाया जा सकता है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचा रही है और आने वाले समय में ऐसे मामलों को बढ़ावा दे सकती है। परीक्षाथियों नें क्या बताया सुनिए 👇
*जिला शिक्षा अधिकारी की चुप्पी पर सवाल, कब होगी सख्त कार्रवाई?*
इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। जब मामला स्पष्ट है और विभागीय अधिकारी खुद गड़बड़ी की पुष्टि कर चुके हैं, तो आखिर जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी किसका इंतजार कर रहे हैं?क्या उच्च स्तर से दबाव का इंतजार किया जा रहा है, या फिर जानबूझकर समय निकाला जा रहा है ताकि मामला अपने आप शांत हो जाए? यदि जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रशासन की कार्यशैली पर एक स्थायी दाग बन सकता है। अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों को चिन्हित कर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। तभी शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रह पाएगा और यह संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। लगभग 1 महीने होने वाले है और जिला शिक्षा अधिकारी क्या कह रहें सुनिए 👇👇
परीक्षा के नाम खुलेआम वसूली और नकल का खेल, बर्रा ओपन परीक्षा केंद्र पर गंभीर आरोप




