अपना घर नहीं बचा सकी ममता, जिस सीट से चुनाव लड़ी वही से हारी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट हमेशा से Mamata Banerjee का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। लेकिन 2026 के चुनाव में वही सीट उनके लिए सबसे बड़ा झटका बन गई। जिस क्षेत्र से उन्होंने कई बार जीत दर्ज की, वहीं इस बार जनता ने साफ संकेत दे दिया कि सिर्फ पुरानी पकड़ या छवि के भरोसे राजनीति नहीं चलती। मतदाताओं ने अपने फैसले से यह दिखा दिया कि अब वे काम, जवाबदेही और भरोसे को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
कड़े मुकाबले में हार, सुवेंदु अधिकारी की निर्णायक जीत
चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और सीधा था। बीजेपी के दिग्गज नेता Suvendu Adhikari ने करीब 15 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर न सिर्फ सीट छीनी, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी दे दिया। यह हार सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि सियासी पकड़ कमजोर पड़ने का संकेत मानी जा रही है। पूरे चुनाव के दौरान यह सीट हाई-वोल्टेज बनी रही और आखिर में नतीजा पूरी तरह उलट गया।

Banerjee, accompanied by senior party leaders Firhad Hakim, Aroop Biswas, Subrata Bakshi and Sovandeb Chattopadhyay, reached the venue in front of Dr B R Ambedkar’s statue on the Red Road around noon and started her protest against the Centre’s alleged stoppage of funds to the state for MGNREGA and other schemes of the housing and road departments. (Photo by Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images)
बड़ा राजनीतिक संदेश, सत्ता पर बढ़ेगा दबाव
भवानीपुर का यह परिणाम राज्य की राजनीति के लिए साधारण नहीं है। इसे सीधे तौर पर सत्ता के खिलाफ बढ़ती नाराजगी और बदलाव की मांग के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हार आने वाले समय में Mamata Banerjee की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर सकती है। वहीं Suvendu Adhikari की यह जीत विपक्ष के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।




