धरमजयगढ़ में करोड़ों का प्रोजेक्ट और RTI से डरी धनवादा कंपनी, क्या है छिपाने की कोशिश?

धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम भालूपखना में संचालित 7.5 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना अब गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। कुछ दिनों पहले यह परियोजना बिजली खम्बो को लेकर समाचार की सुर्खियों में बना हुआ था। वही अब अचानक हैदराबाद की धनवादा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने ही पूर्व सहयोगी रोहित श्रीवास्तव पर लगाए गए आरोपों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि परियोजना पूरी तरह नियमों के तहत संचालित हो रही है, तो फिर RTI आवेदन और दस्तावेज सामने आने से कंपनी इतनी परेशान क्यों दिखाई दे रही है?

*RTI से घबराहट या कुछ छिपाने की कोशिश?*
कंपनी ने पुलिस आवेदन में आरोप लगाया है कि लगातार RTI लगाकर परियोजना को बदनाम किया जा रहा है। लेकिन लोकतंत्र में RTI नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में RTI को ही “षड्यंत्र” बताना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सबकुछ पारदर्शी है तो कंपनी को दस्तावेज सार्वजनिक करने में डर कैसा?

*अब असली सवाल*
👉 क्या RTI और सवाल पूछना अब कंपनियों को “षड्यंत्र” लगने लगा है?
👉 क्या करोड़ों के प्रोजेक्ट में सबकुछ नियमों के तहत हुआ है?
👉 कंपनी आखिर किस बात से इतनी डरी हुई है?
👉 क्या जांच के नाम पर आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश हो रही है?

अब पूरे मामले में लोगों की नजर प्रशासन और पुलिस जांच पर टिकी हुई है। जांच निष्पक्ष हुई तो इस परियोजना से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आ सकते हैं, जो अब तक पर्दे के पीछे हैं।





