फिर हुआ एक हाथी शावक का धरमजयगढ़ वनमंडल में मौत, DFO के कार्यकाल में मौत का सिलसिला जारी…..

धरमजयगढ़ वनमंडल में आखिर कब रुकेगी हाथियों की मौत?
धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों की लगातार हो रही मौत अब सामान्य घटना बनती जा रही है। बताया जा रहा छाल रेंज के तरेकेला गांव के पास स्थित केराझरिया डेम 511 आरएफ क्षेत्र में एक 5 माह के हाथी शावक की दलदल में फंसने से दर्दनाक मौत हो गई। लगातार दूसरी बार हाथी शावक की मौत ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और डीएफओ क़ी जमीनी कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाथियों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित?
जानकारी के अनुसार हाथियों का दल क्षेत्र में विचरण कर रहा था, तभी छोटा शावक दलदल में फंस गया। बताया जा रहा है कि काफी देर तक हाथियों का दल उसे बचाने की कोशिश करता रहा, लेकिन शावक बाहर नहीं निकल सका और उसकी मौत हो गई। सवाल यह उठ रहा है कि जिस क्षेत्र में लगातार हाथियों की आवाजाही रहती है, वहां ऐसे खतरनाक दलदली इलाकों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था आखिर क्यों नहीं की गई? वन विभाग अक्सर हाथी निगरानी, पेट्रोलिंग और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत हर बार अलग नजर आती है। यदि समय रहते संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और बचाव की व्यवस्था होती, तो शायद एक और हाथी शावक की जान बच सकती थी।

*कुछ ही दिनों में दूसरी मौत, फिर भी जिम्मेदार मौन*
बीते शुक्रवार को भी छाल रेंज के सिंघीझाप डेम में पानी में डूबने से एक हाथी शावक की मौत हुई थी। अब कुछ ही दिनों के भीतर दूसरी घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जबसे धरमजयगढ़ में नए DFO ने कार्यभार संभाला है, तबसे हाथियों की मौत की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कार्यालय में बैठे-बैठे जांच और औपचारिक कार्रवाई तक सीमित हैं।
लोगों का आरोप है कि वन विभाग घटनाओं के बाद केवल खानापूर्ति करता है, जबकि जंगलों में वास्तविक निगरानी और हाथियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। हजारों रुपये वन्यजीव संरक्षण के नाम पर खर्च होने के बावजूद ऐसी घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं।

*35 हाथियों का दल क्षेत्र में मौजूद, ग्रामीणों में दहशत*
बताया जा रहा है कि घटना स्थल के आसपास अभी भी लगभग 35 हाथियों का दल मौजूद है, जिससे आसपास के गांवों में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग समय पर सही सूचना और सुरक्षा व्यवस्था देने में भी कई बार विफल साबित होता है। हाथियों और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों की मौत का सिलसिला कब रुकेगा? क्या हर घटना के बाद केवल जांच और बयानबाजी ही होती रहेगी, या फिर वन विभाग जमीनी स्तर पर भी कोई ठोस कदम उठाएगा?





