छाल खदान में मजदूरों की शिकायत पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन, तहसीलदार की पहल से जांच टीम गठित; चुन्नी के कारनामो का खामियाजा भुगतेगा SKA?

रायगढ़/छाल। छाल क्षेत्र की लात खुली खदान में ठेका कंपनी एसकेए (SKA) के खिलाफ मजदूरों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को जिला प्रशासन ने अब बेहद गंभीरता से लिया है। मजदूरों की शिकायत के बाद तहसीलदार स्तर से मामला प्रशासन तक पहुंचा और अब कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच दल गठित कर दिया है।
दरसल यह घटना तब हुई ज़ब SKA कंपनी द्वारा चुन्नी को अपनी मनमानी करने खुली छूट दें दिया गया जिसका नतीजा यह रहा की मजदूरों का जमकर शोषण हुआ और मंजदूरों नें नें गंभीर आरोप चुन्नी पर लगाए।
तहसीलदार द्वारा मजदूरों का भरपूर सहयोग और मजदूरों के शोषण पर गंभीरता से ध्यान देने का नतीजा के कारण अब जांच टीम का गठन हुआ हैं मजदूरों ने आरोप लगाया था कि कंपनी उनसे निर्धारित समय से अधिक काम कराया जा रहा है, अवकाश नहीं दिया जा रहा, एचपीसी दर का लाभ नहीं मिल रहा, वेतन से कथित तौर पर अवैध कटौती की जा रही है और अपने अधिकारों की मांग करने वाले श्रमिकों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
12 घंटे काम, ₹6 हजार तक कटौती के आरोप—अब होगी दस्तावेजों की जांच

शिकायत में मजदूरों ने आरोप लगाया कि नियमानुसार 8 घंटे की जगह 12-12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। साथ ही महीने में 30-31 दिन काम कराने की बात भी सामने आई है। मजदूरों ने वेतन में विसंगति, एचपीसी दर का लाभ नहीं देने, ई-स्लिप और सेफ्टी किट जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने तथा घर से आने-जाने वाले कर्मचारियों के वेतन से कथित तौर पर ₹6,000 तक की कटौती किए जाने का आरोप लगाया है। कलेक्टर के आदेश में जांच दल को ठेका कंपनी के मस्टर रोल, वेतन भुगतान और एचपीसी दरों के क्रियान्वयन से जुड़े दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पीड़ित श्रमिकों और ठेका कंपनी प्रबंधन के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
अब सिर्फ छाल नहीं, जिले की दूसरी खदानें भी जांच के दायरे में

मामले को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा दायरा तय किया है। जांच केवल लात खुली खदान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले की अन्य खदानों में कार्यरत ठेका कंपनियों द्वारा श्रम कानूनों के पालन की भी जांच की जाएगी।जांच दल में डिप्टी कलेक्टर शिल्पा भगत को अध्यक्ष, सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम पाणिग्राही, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के उप संचालक राहुल पटेल, खनिज अधिकारी रमाकांत सोनी तथा संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार को सदस्य बनाया गया है। दल को श्रम नियमों, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम और औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जांच कर 7 दिनों के भीतर संयुक्त जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।जिला प्रशासन का यह आदेश साफ संकेत दे रहा है कि मजदूरों की शिकायतों को अब महज कागजी शिकायत मानकर दबाया नहीं जाएगा। जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित ठेका कंपनी पर नियमानुसार कार्रवाई की राह खुल सकती है।
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