चुन्नी ने कहा काम पर मत आना..छाल खदान में मजदूरों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर? SKA दोषी नहीं तो चुप्पी क्यों…

छाल स्थित SECL कोयला खदान की ठेका कंपनी SKA से जुड़े विवाद में अब एक और गंभीर आरोप सामने आया है। मजदूरों का कहना है कि उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए। सवाल यह है कि आखिर किस उद्देश्य से मजदूरों से ऐसे कागज पर हस्ताक्षर लिए गए और बाद में उस पर क्या लिखा जाना था?यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या मजदूरों के हस्ताक्षर का संभावित दुरुपयोग—इसकी जांच होना जरूरी है। क्या हस्ताक्षर करवाने SKA कंपनी द्वारा चुन्नी को कहा गया होगा अगर नहीं तो कंपनी इसपर क्यों संज्ञान नहीं लें रहा कही इसमें कंपनी का मिलीभगत तो नहीं?
कैमरे के सामने मजदूरों ने फिर लिया ‘चुन्नी’ का नाम
इस पूरे मामले में मजदूरों ने कैमरे के सामने भी चुन्नी का नाम लेते हुए आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि नौकरी और शिकायतों को लेकर उन्हें धमकाया गया तथा उनसे कहा गया कि वे काम पर न आएं। अब मामला केवल मजदूरी और भुगतान की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। मजदूरों से कथित तौर पर कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप भी जांच का विषय बन गया है।
SKA दोषी नहीं तो चुन्नी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल SKA कंपनी प्रबंधन से है। यदि मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं, तो कंपनी खुलकर सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती? और यदि कंपनी का कहना है कि चुन्नी का कंपनी के आधिकारिक कामकाज से कोई संबंध नहीं है, तो फिर मजदूरों द्वारा बार-बार उसका नाम लिए जाने के बावजूद कंपनी की ओर से उनकी भूमिका स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? अगर चुन्नी कंपनी के अधिकृत कर्मचारी या प्रतिनिधि हैं तो उनका पद, जिम्मेदारी और अधिकार सार्वजनिक किए जाने चाहिए। और यदि वे अधिकृत नहीं हैं, तो मजदूरों के अनुसार नौकरी से निकालने की बात कहने और कंपनी के मामलों में हस्तक्षेप करने पर कंपनी प्रबंधन ने क्या कार्रवाई की—यह भी सामने आना चाहिए।
कलेक्टर नें जांच टीम गठित किया

छाल क्षेत्र की लात खुली खदान में ठेका कंपनी एसकेए (SKA) के खिलाफ मजदूरों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को जिला प्रशासन ने अब बेहद गंभीरता से लिया है। मजदूरों की शिकायत के बाद तहसीलदार स्तर से मामला प्रशासन तक पहुंचा और अब कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच दल गठित कर दिया है।

अब सवाल सीधा है—मजदूरों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर क्यों करवाए गए?
चुन्नी की कंपनी में वास्तविक भूमिका क्या है?
मजदूरों को नौकरी से निकालने की बात किस अधिकार से कही गई?
और यदि चुन्नी की भूमिका गलत थी तो SKA ने अब तक क्या कार्रवाई की?
इन सवालों के जवाब अब मजदूर ही नहीं, बल्कि प्रशासन और क्षेत्र के लोग भी जानना चाहते हैं।
धरमजयगढ़ से सैकड़ों ग्रामीण पहुँचे रायगढ़ कलेक्टरेट… मीटिंग में ऐसा क्या हुआ की वहा कई ग्रामीण नियम और शर्तों पर ही ज़मीन देने की बात कहने लगे…?




