मैदान में तड़पते नन्हे हाथी, बंद AC कमरे में फाइलें पलटते साहब: क्या यही है वन्यजीव संरक्षण?

धरमजयगढ़ वन मंडल में पूर्व में डीएफओ अभिषेक जोगावत के समय लगातार हाथियों का मौत का सिलसिला जारी था जिससे पर्यावरण प्रेमियों हाथी संरक्षकों और ग्रामीण के बीच चिंता का माहौल था। वही अभिषेक जोगावत के ट्रांसफर के बाद इन लोगों को उम्मीद जागी क़ी नए अधिकारी के आने से यह सिलसिला तों थम जाएगा पर यहां तों लोगों क़ी सोच ही उलटी पड़ गई। एक तरफ जहा क्यास लगाए जा रहें थे क़ी यह सिलसिला रुकेगा वही इसके विपरीत स्थिति और खराब होते जा रही हैं। कुछ ही दिनों में 2 हाथी शावकों के मौत नें डीएफओ के कार्य करने के तरीके और वन -वन्य जीव सुरक्षा के दावों क़ी पोल खोल दी हैं। अबतक वन मंडल धरमजयगढ़ में डीएफओ जीतेन्द्र उपाध्याय के कार्यभार संभालने के बाद करीब 3-4 हाथीयों क़ी मौत हो चुकी हैं जिसमें शावक भी शामिल हैं।

*मिनटों में तों नहीं हुई होंगी मौत जो कर्मचारी को जानकारी नहीं…?*
हैरानी क़ी बात यह है क़ी दलदल में शावक घंटों फसा रहा और उसकी मौत हो गई जबकी विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी को इसकी जानकारी तक नहीं मिली। या यू कहे क़ी इतना बड़ा वन विभाग अमला एक नन्हे हाथी शावक को नहीं बचा सका। देखा जाए तों दलदल जैसे स्थिति में फसने के बाद घंटों का समय लगा होगा शावक को तड़प तड़प कर दम तोड़ने में। उस समय जो जिम्मेदार कर्मचारी मैदान पर तैनात होंगे वे कहा थे? क्या वह चेम्बर में बैठ आराम फरमा रहें थे या अपनी जिम्मेदारी से पीछे भाग रहें थे। वही शावक क़ी जान विभाग के निष्क्रियता के कारण गई तों इसमें विभाग के अधिकारी कर्मचारी पर क्या कार्यवाही होंगी..?




