फांसी की रस्सी गले में डालकर और चिता पर लेटकर किसान व आदिवासी कर रहें प्रदर्शन.. पढ़े पूरी खबर….

केन-बेतवा लिंक परियोजना, जिसे देश की पहली महत्वाकांक्षी ‘नदी जोड़ो परियोजना’ कहा जा रहा है, अब विवादों के गहरे भँवर में फँस गई है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में ढोडन बांध के पास हजारों आदिवासी और किसान पिछले 10 दिनों से अनूठे और हृदयविदारक गले में फांसी की रस्सी व चिता पर लेटकर अनोखे तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है— “न्याय दो या मौत दो।” वही सरकार का दावा है कि 10 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी। इसके साथ ही बुंदेलखंद के बंजर इलाकों तक पानी पहुंच सकेगा और लोगों को खेती करने में आसानी हो जाएगी। 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा और 103 मेगावाट बिजली बनेगी। परियोजना की लागत 44,605 करोड़ रुपये है। लेकिन इस परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा और 10500 हेक्टेयर जंगल डूब में आ सकता है ।
आंदोलन के प्रमुख रूप: मिट्टी से चिता तक

आंदोलनकारियों ने विरोध के ऐसे तरीके अपनाए हैं जो प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं:
लगभग 5000 ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं, सांकेतिक चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जमीन छीनने के बाद जीवन का कोई मोल नहीं है। मंगलवार को दूसरे दिन ग्रामीणों ने केन नदी की मिट्टी अपने शरीर पर मली। यह संकल्प लिया गया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। इससे पूर्व ग्रामीणों ने नदी के ठंडे पानी में खड़े होकर ‘जल सत्याग्रह’ के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया था। कई गांवों में बुजुर्गों और बच्चों समेत सभी ने भूखे रहकर आंदोलन का समर्थन किया, जिससे गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
प्रशासन पर गंभीर आरोप: फर्जी ग्राम सभा और भ्रष्टाचार

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता और प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन पर ‘कागजी विकास’ का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि रुंज, मझगांय और नेगुवा बांध से जुड़ी ग्राम सभाएं केवल कागजों पर पूरी की गईं, हकीकत में ग्रामीणों की सहमति नहीं ली गई। आरोप है कि मुआवजे की राशि में अवैध कटौती हो रही है और गरीबों से पहचान पत्र बनवाने के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन बिना पूर्ण पुनर्वास और उचित मुआवजे के उन्हें बेदखल करने की कोशिश कर रहा है।
- सांकेतिक फांसी की चेतावनी

प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलनकारियों ने विरोध की सीमा पार करने का ऐलान किया है। बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारी ‘सांकेतिक फांसी’ लगाकर सरकार को यह संदेश देंगे कि विस्थापन उनके लिए मृत्यु के समान है।
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना? (महत्व और विवाद)

यह ₹44,605 करोड़ की लागत वाली भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है।
लक्ष्य: मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को 221 किमी लंबी नहर के जरिए उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में भेजना। बुंदेलखंड के झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना और छतरपुर जिलों में 10 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली उत्पादन। वही इस परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा और लगभग 10,500 हेक्टेयर जंगल जलमग्न हो सकता है । हजारों आदिवासियों की संस्कृति और आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आदिवासियों के विनाश की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं करेंगे।” हजारों की भीड़ अब भी ढोडन बांध पर डटी हुई है, और ‘भूख-पड़ताल’ के साथ आंदोलन और उग्र होता जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन संवाद के जरिए समाधान निकालता है या यह संघर्ष किसी बड़ी अनहोनी की ओर बढ़ता है।




