
डीएवी पब्लिक स्कूल, एसईसीएल, छाल की होनहार छात्रा आद्यशा परिदा ने कक्षा 10वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए 500 में से 499 अंक प्राप्त किए हैं। 99.8 प्रतिशत अंकों के साथ उन्होंने न केवल अपने विद्यालय बल्कि पूरे रायगढ़ जिले और छाल के कोयला क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ वह छत्तीसगढ़ राज्य की टॉपर बनकर उभरी हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। स्कूल प्रबंधन, शिक्षकगण, परिजन और शुभचिंतक सभी इस सफलता पर अत्यंत गौरवान्वित हैं।

मेहनत, लगन और संघर्ष की मिसाल बनी आद्यशा
आद्यशा परिदा, भौतिकी की लेक्चरर श्रीमती सोमा परियाल और अंग्रेजी के लेक्चरर श्री देवाशीषा परिदा की पुत्री हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नर्सरी कक्षा से लेकर कक्षा 10वीं तक डीएवी पब्लिक स्कूल, एसईसीएल, छाल में ही पूरी की। बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और अनुशासित रहने वाली आद्यशा ने हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनकी मेहनत और निरंतरता का परिणाम पहले भी उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड में दिखाई देता रहा है।बोर्ड परीक्षा के नजदीक आते समय उनकी माता का तबादला हो गया, जो किसी भी छात्र के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती थी, लेकिन आद्यशा ने इस परिस्थिति को अपनी पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने मानसिक और भावनात्मक रूप से खुद को मजबूत रखते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनका यह समर्पण और आत्मविश्वास ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बना।

सफलता का श्रेय और भविष्य का बड़ा लक्ष्य
आद्यशा अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, विद्यालय के प्राचार्य श्री के.डी. शर्मा और उन सभी लोगों को देती हैं जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनका मार्गदर्शन किया। इस शानदार उपलब्धि के बाद उनका लक्ष्य और भी बड़ा हो गया है। अब वह पूरी लगन, मेहनत और एकाग्रता के साथ जेईई परीक्षा की तैयारी करना चाहती हैं, ताकि 12वीं के बाद प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश प्राप्त कर सकें।आद्यशा परिदा की यह सफलता न केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे छाल क्षेत्र और कोयला अंचल के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी स्थान या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। इस दूरस्थ क्षेत्र से निकलकर उन्होंने यह दिखाया है कि यहां सिर्फ काला हीरा ही नहीं, बल्कि ऐसे चमकते हुए “असली हीरे” भी पैदा होते हैं जो पूरे देश में अपनी प्रतिभा की रोशनी बिखेर सकते हैं। पूरा क्षेत्र और राज्य उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है।




