मजदूरों से वसूली मामले में कार्यवाही का इंतजार, कब मिलेगा मजदूरों को न्याय।

जिले के South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) के छाल उपक्षेत्र स्थित लात खुली खदान में कार्यरत मजदूरों द्वारा लगाए गए शोषण और अवैध वसूली के आरोपों का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा कराई गई जांच पूरी हो चुकी है और अब क्षेत्र के सैकड़ों मजदूर प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
मामला उस समय चर्चा में आया जब खदान में कार्यरत मजदूरों ने सामूहिक रूप से शिकायत करते हुए रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (आर.के.एस.) ठेका कंपनी और मजदूर सेवा समिति छाल के खिलाफ आर्थिक शोषण, अवैध वसूली और भयादोहन के गंभीर आरोप लगाए। मजदूरों ने इस संबंध में जिला प्रशासन के समक्ष कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर न्याय की मांग की थी।
*संगठन के नाम पर वसूली का आरोप*
शिकायतकर्ता मजदूरों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व “मजदूर सेवा समिति छाल” नाम से एक संगठन का गठन किया गया था। उस समय मजदूरों को यह भरोसा दिलाया गया था कि यह संगठन उनके अधिकारों की रक्षा करेगा, श्रमिकों की समस्याओं को प्रशासन और कंपनी के समक्ष उठाएगा तथा श्रम संबंधी विवादों के समाधान में उनकी मदद करेगा।
मजदूरों का आरोप है कि संगठन के गठन के बाद प्रत्येक श्रमिक से संगठनात्मक व्यय के नाम पर पहले एकमुश्त 5000 रुपये लिए गए। इसके बाद 500 रुपये प्रतिमाह अंशदान निर्धारित किया गया, जिसे कुछ समय बाद बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। मजदूरों का कहना है कि यह राशि नियमित रूप से ली जाती रही, लेकिन संगठन की ओर से कभी भी आय-व्यय का स्पष्ट विवरण, लेखा-जोखा या ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।

*पारदर्शिता मांगने पर धमकाने का आरोप*
मजदूरों का आरोप है कि जब कुछ श्रमिकों ने संगठन से वित्तीय पारदर्शिता की मांग की और अंशदान की राशि के उपयोग के बारे में जानकारी चाही, तब उन्हें धमकाया गया। कथित रूप से कुछ मजदूरों को काम से निकालने की चेतावनी दी गई और कुछ श्रमिकों को रोजगार से भी वंचित कर दिया गया। पीड़ित मजदूरों का कहना है कि लंबे समय से इस तरह की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन डर और रोजगार खोने की आशंका के कारण अधिकांश मजदूर खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे थे। अंततः कई मजदूरों ने एकजुट होकर इस पूरे मामले की शिकायत प्रशासन से की।
*कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचा मामला*
श्रमिकों की शिकायत जिला मुख्यालय तक पहुंचने के बाद मामला कलेक्टर जनदर्शन में उठाया गया। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी छाल तहसील कार्यालय को सौंपी गई।
जांच के दौरान मजदूरों के बयान दर्ज किए गए, संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गई और संगठन तथा ठेका कंपनी से जुड़े पक्षों से भी जानकारी ली गई। प्रशासन द्वारा पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की बारीकी से जांच की गई।
*तहसीलदार ने बताया – जांच पूरी*
छाल के तहसीलदार लोमेश मिरी ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि शिकायत से जुड़े सभी तथ्यों की विस्तृत पड़ताल की गई है और संबंधित पक्षों से जानकारी प्राप्त की गई है। जांच के आधार पर तैयार रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

*मजदूरों को न्याय की उम्मीद1*
जांच पूरी होने के बाद अब क्षेत्र के मजदूर प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो इससे उन्हें न्याय मिलेगा और भविष्य में मजदूरों के शोषण जैसी घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। मजदूरों का यह भी कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों और सम्मानजनक कामकाजी माहौल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित निर्णय करेगा। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या मजदूरों को वह न्याय मिल पाता है जिसकी वे लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं।




