धरमजयगढ़ में कपड़े के टेंट में सज गई पटाखा दुकानें, सुरक्षा नियमों की उड़ रही धज्जियां! कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा, कलेक्टर के आदेश की भी अनदेखी?

धरमजयगढ़ में अस्थायी पटाखा दुकानों के संचालन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां कपड़े की चादरों से बनाए गए टेंट में पटाखों की दुकानें संचालित की जा रही हैं। ज्वलनशील सामग्री से बने ऐसे टेंट में विस्फोटक सामग्री की बिक्री को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। पटाखों की दुकानें बेहद संवेदनशील होती हैं, जहां छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है तो यह आम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ से कम नहीं है।
नियमों की अनदेखी या जिम्मेदारों की चुप्पी? हादसे के बाद जागेगा प्रशासन!
पटाखा दुकानों के संचालन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। अस्थायी दुकानों में भी सुरक्षित निर्माण, पर्याप्त दूरी, अग्निशमन उपकरण, रेत और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए। ऐसे में कपड़े के टेंट में पटाखों की बिक्री हो रही है तो इसकी गंभीरता से जांच जरूरी है। सवाल यह है कि दुकानों को अनुमति देते समय सुरक्षा मानकों की जांच की गई थी या नहीं? क्या अग्निशमन व्यवस्था का निरीक्षण किया गया? यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आखिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने का इंतजार क्यों किया जा रहा है?
कलेक्टर के नियमित जांच के आदेश के बावजूद धरमजयगढ़ में पालन नहीं? तत्काल हो दुकानों का निरीक्षण
बताया जा रहा है कि कलेक्टर द्वारा पटाखा दुकानों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। लेकिन धरमजयगढ़ में कपड़े के टेंट में संचालित पटाखा दुकानों की स्थिति इन निर्देशों के पालन पर सवाल खड़े कर रही है। यदि नियमित निरीक्षण हो रहा है तो ऐसी दुकानों में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति सामने क्यों नहीं आ रही? शासन-प्रशासन को तत्काल सभी अस्थायी पटाखा दुकानों का निरीक्षण कराना चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या समय रहते लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?
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