धरमजयगढ़ के मिरीगुड़ा में घास मद का जमीन हुआ ‘बड़े झाड़ का जंगल’…?

धरमजयगढ़ तहसील के ग्राम मिरीगुड़ा से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। यहां जो भूमि घास मद में सुरक्षित रूप से दर्ज थी उसे षड्यंत्र कर बड़े झाड़ का जंगल दर्शाकर पट्टा दे दिया गया। जिससे सवाल खड़ा होता हैं की आखिर ऐसा कौनसा नया नियम धरातल पर आ गया जो घास मद की भूमि बड़े झाड़ के जंगल में बदल गई। और इसे दुर्योधन कुमार, पिता कुरसो को जारी कर दिया गया। धरमजयगढ़ से सामने आ रहें एक से बढ़कर एक मामला में यह भी विचित्र मामला सामने आया हैं। कही शासकीय भूमि का निजीकरण हो रहा तो कही अबाँटन भूमि की खरीदी बिक्री हो रही वही अब रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ की खबर सामने आ रही।
6.38 हेक्टेयर ‘घासमत’, फिर 1.0110 हेक्टेयर में ‘बड़े झाड़ का जंगल’

रिकार्ड अनुसार मिरीगुड़ा के खसरा नंबर 387 की कुल 6.38 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेख में ‘घासमत’ अर्थात सुरक्षित राजस्व भूमि के रूप में दर्ज थी। इसी खसरा नंबर के 387/4 में 1.0110 हेक्टेयर भूमि ‘बड़े झाड़ का जंगल’ दर्शाते हुए दुर्योधन कुमार, पिता कुरसो, के नाम पट्टा जारी किया गया।
पुराने पट्टे से लेकर वन अधिकार पट्टे तक बदला रिकॉर्ड
वर्ष 1977 के आदेश के अनुसार जगन्नाथ पिता हरि महक के नाम अस्थायी पट्टा जारी किया गया था। इसके बाद खसरा नंबर 387/1 और 387/2 से संबंधित भूमि के रिकॉर्ड में जंगल की मद दर्ज होने का उल्लेख है। वर्ष 2013-14 के बी-1 खसरा के अवलोकन में खसरा नंबर 387/1 में ‘छोटे झाड़ का जंगल’ दर्ज था। इसके बाद दुर्योधन कुमार को वन अधिकार पट्टा मिलने के पश्चात वन अधिकार का नामांतरण करते हुए खसरा नंबर 387/4 आवेदक को दिए जाने का उल्लेख है।
ग्राम सभा के प्रस्ताव और ऑनलाइन खसरा के आधार पर पट्टा, अब मामला चर्चा में
अब सवाल यह है कि जब मूल रिकॉर्ड में 6.38 हेक्टेयर भूमि ‘घासमत’ दर्ज थी, तो उसके हिस्से की 1.0110 हेक्टेयर भूमि ‘बड़े झाड़ का जंगल’ के रूप में किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुई और उसी आधार पर पट्टा कैसे जारी हुआ? यही रिकॉर्ड की कड़ियां इस पूरे मामले को गंभीर बनाती हैं।
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