अडानी ग्रुप के कर्मचारी के गांव जाने पर विरोध, कुछ घटना घटेगी तों जिला प्रशासन और अडानी ग्रुप होगा जिम्मेदार :- ग्रामीणों की चेतावनी…

अडानी समूह की गतिविधियों का विरोध: रायगढ़ के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
धरमजयगढ़ के पुरूंगा क्षेत्र अंतर्गत अडानी ग्रुप मेसर्स अंबुजा सीमेंट का भूमिगत कोयला खदान को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा कुछ महीना पहले हुए गहमा-गहमी के बाद क्षेत्र में थोड़ी शांति देखने को मिली ही थी की फिरसे कंपनी के कर्मचारियों के कार्यप्रणाली को लेकर माहौल गरमाता दिखाई पड़ रहा जिसको लेकर ग्रामीणों नें 30 मार्च यानि बीते दिन छाल थाना में आवेदन प्रस्तुत किए है। अगर ऐसा ही माहौल रहा तों अडानी ग्रुप अगर दोबारा जनसुनवाई का प्रयास करती है तों उसे मुँह की खाने पड़ सकती है। जो माहौल क्षेत्र का वर्तमान में है उसे देखकर साफ कहा जा सकता है की कोयला खदान खोलना किसी भी कंपनी के लिए नामुमकिन जैसा है।
कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि कंपनी की गतिविधियों से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पत्र में सीधे तौर पर कहा गया है कि:”यदि भविष्य में ग्रामीणों के आक्रोश के कारण क्षेत्र की कानून-व्यवस्था बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और अडानी समूह की होगी।”
*प्रशासन और कंपनी पर गंभीर सवाल*
शिकायत के अनुसार, ग्राम सभा के स्पष्ट निषेध के बावजूद अडानी समूह के कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र में लगातार आवाजाही की जा रही है। ग्रामीणों ने इसे न केवल ग्राम सभा के निर्णय का अपमान बताया है, बल्कि इसे राष्ट्रपति और राज्यपाल के “गोद क्षेत्र” (अनुसूचित क्षेत्र) की संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन भी करार दिया है।

ग्राम सभा निर्णय की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून, 1996 के तहत आते हैं। इन प्रावधानों के अनुसार, ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पारंपरिक ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से पुरुंगा कोल ब्लॉक के खनन कार्य को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है और इस संबंध में प्रस्ताव जिला प्रशासन को पहले ही सौंपा जा चुका है।
प्रमुख मांगें: पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची की शक्तियों का सम्मान करते हुए अडानी समूह की गतिविधियों पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।ग्राम सभा के ‘ना’ के अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए कोल ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया को निरस्त किया जाए।यह पत्र ग्राम पंचायत के सरपंचों, पंचों और पारंपरिक ग्राम प्रमुखों द्वारा समस्त ग्रामवासियों की ओर से जारी किया गया है, जिसकी प्रतिलिपि स्थानीय थाना प्रभारी को भी सौंपी गई है।



