सोशल मीडिया पर घिरी धरमजयगढ़ नगर पंचायत, विकास कार्यों को लेकर जनता का फूटा गुस्सा

अध्यक्ष से लेकर अधिकारियों तक पर सवालों की बौछार, ‘पैसा आया पर विकास नहीं’ का आरोप
धरमजयगढ़। नगर पंचायत धरमजयगढ़ इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी आलोचनाओं का सामना कर रही है। नगर के विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर नागरिक खुलकर सवाल उठा रहे हैं। फेसबुक सहित विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म पर लगातार आ रही टिप्पणियों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
नगरवासियों का आरोप है कि विकास के नाम पर घोषणाएं तो लगातार हो रही हैं, लेकिन धरातल पर काम नजर नहीं आ रहा। कई लोगों ने सीधे तौर पर अध्यक्ष और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा दिए।
*सोशल मीडिया पर जनता लिख रहें*
सोशल मीडिया पर एक नागरिक ने लिखा — “ लगातार हो रहा कार्य का पैसा वापस”, जिससे अधूरे कार्यों को लेकर जनता की नाराजगी सामने आई।
वहीं एक अन्य टिप्पणी में कहा गया कि “काम करने के लिए इच्छा शक्ति चाहिए, न कि पसंदीदा ठेकेदार और प्रतिशत व्यवस्था।”
कुछ पोस्ट में नगर पंचायत पर कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए गए। एक यूजर ने उदाहरण देकर लिखा कि “जब अधिकारी सही नहीं हों तो व्यवस्था बिगड़ जाती है और जनप्रतिनिधि हर काम में कमीशन खोजने लगते हैं।” वहीं दुकान निर्माण और ठेला लगाने को लेकर अलग-अलग शुल्क वसूली के आरोप भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
नगर विकास को लेकर सबसे ज्यादा सवाल डीएमएफ मद से आई राशि पर उठाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि विकास के लिए पैसा आने के बावजूद नगर में बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।

एक पोस्ट में लिखा गया — “धरमजयगढ़ के विकास के लिए राशि आई थी, लेकिन विकास कहीं नजर नहीं आता, क्या यह सिर्फ नाम और वाहवाही बटोरने का तरीका था?” सोशल मीडिया पर #पुछता_है_धरमजयगढ़ अभियान की धमाकेदार शुरुआत हो रही है।
लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार केवल घोषणा होते ही वाहवाही शुरू हो जाती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग रहती है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर उठ रहे इन गंभीर आरोपों पर नगर पंचायत की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन जनता के सवालों का जवाब देता है या यह नाराजगी आने वाले समय में जनप्रतिनिधियों कों अपनी कुर्सी गवाकर चुकानी पड़ेगी।

नोट:- यह सम्पूर्ण समाचार सोशल मिडिया पर चल रहें बहस कों लेकर आधारित हैं





