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उन्मेश पटेल कापू तहसीलदार कों कलेक्टर नें किया सम्मानित

धरमजयगढ़ विकासखंड के कापू तहसीलदार उन्मेश पटेल कों विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य के लिए सम्मानित किया गया हैं। यह सम्मान उन्हें रायगढ़ जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी द्वारा किया गया हैं। देखा जाए तों रायगढ़ जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में धरमजयगढ़ का नाम सबसे आगे था वही धरमजयगढ़ के कापू नें इसमें बाजी मारी। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूचियों की शुद्धता एवं सटीकता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में करोड़ मतदाताओं को शामिल करते हुए मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया है। यह 2002-2005 के बाद से पहला राष्ट्रव्यापी एस.आई.आर. है जिसका उद्देश्य डुप्लिकेट, माइग्रेटेड या अयोग्य प्रविष्टियों (मतदाताओं) को समाप्त करना और मतदाता पात्रता को सत्यापित करना है।छत्तीसगढ़ के सभी विधानसभा क्षेत्रों से मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया गया है। राज्य के सभी मतदान केंद्रों के बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) वितरित किए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग समय-समय पर वोटर लिस्ट को अपडेट करता है ताकि उसमें कोई गलती न रहे। इसी प्रक्रिया को SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण कहते हैं। इसी के चलते करीब दो दशकों बाद अब चुनाव आयोग ने फिर से देशभर में SIR शुरू किया है। इसकी शुरुआत बिहार से की गई, जहां लगभग 69 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, यानी ऐसे नाम जो अब पात्र नहीं थे। जैसे मृतक, डुप्लीकेट या बाहर शिफ्ट हो चुके लोग, इसके बाद बिहार की कुल वोटर संख्या करीब 7.43 करोड़ रह गई. अब चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि यह प्रक्रिया 12 और राज्यों में लागू की जाएगी, जिनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे बड़े राज्य शामिल हैं इन राज्यों की पुरानी वोटर लिस्ट फ्रीज कर दी जाएंगी यानी अब उनमें बदलाव सिर्फ SIR प्रक्रिया के जरिए ही होंगे

क्या होता है SIR..?

SIR का मतलब वोटर लिस्ट की पूरी तरह से गहन जांच और पुनरीक्षण होता है इसमें चुनाव आयोग के अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी लेते हैं, यह देखते हैं कि कौन लोग पात्र हैं, किसका नाम गलती से छूट गया है, और किनके नाम अब हटाए जाने चाहिए इस प्रक्रिया के बाद एक नई वोटर लिस्ट तैयार होती है

देश में पहली बार SIR कब हुआ था..?

भारत में पहला आधिकारिक SIR 2002 से 2004 के बीच किया गया था यह उस समय एक बहुत बड़ी पहल थी क्योंकि तबतक वोटर लिस्ट में भारी गलतियां पाई जाती थीं कई राज्यों में पुराने डेटा के कारण लाखों नाम दोहराए गए थे या गलत जगह दर्ज थे। 2003 में बिहार में भी एक बड़ा पुनरीक्षण अभियान चला था यही वजह है कि अब चुनाव आयोग ने 2025 में नया SIR शुरू किया है।

क्यों जरूरी होती है SIR..?

समय के साथ वोटर लिस्ट में कई प्रकार की गड़बड़ियां हो जाती हैं कोई व्यक्ति एक ही जगह पर दो बार दर्ज हो जाता है, किसी का नाम पुरानी जगह पर रह जाता है जबकि वह दूसरी जगह शिफ्ट हो गया होता है, कुछ लोगों के नाम गलत स्पेलिंग में होते हैं और कई लोगों का नाम मरने के बाद भी सूची में बना रह जाता है ऐसी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए चुनाव आयोग SIR करता है, ताकि अगली बार जब चुनाव हों, तो वोटर लिस्ट पूरी तरह सटीक और निष्पक्ष हो।

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Mukesh Mourya

मुकेश मौर्य (संपादक) ग्रामीण न्यूज़ 24 , पता - रायगढ़ , छत्तीसगढ़ मो . +919752981420

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