क्या हुआ लिखित अश्वासन का, आखिर क्यों नहीं ही सका लिखित अश्वासन के बाद भी छाल-एडू सडक निर्माण…?
आश्वासन धारा का धरा रह गया और अब तक नहीं हो पाया सड़क निर्माण जो भीड़ उग्र होकर सड़क निर्माण करवाना चाह रही थी आज वहां भीड़ खामोश उसी रास्ते का आवागमन के लिए उपयोग कर रही है आखिर ऐसा क्या कारण था जो उसे समय क्षेत्र के कई दिग्गज नेता और सैकड़ों ग्रामीण मार्च महीने में सड़क पर बैठे हुए थे वह यहां तक कह रहे थे कि इस बार आश्वासन नहीं चलेगा इस बार कार्य होगा तभी हटेंगे पर जैसे ही एक बार फिर से आश्वासन मिला वे सभी उठ गए और अब 2025 समाप्त होने कों हैं अबतक सड़क भी निर्माण नहीं हो सका और अब वापस सड़क निर्माण की मांग भी नहीं कर रहे हैं…?
लोंग यह तक कह रहें हैं कि कोई लिखित अश्वासन नहीं मिला था बस जनता कों गुमराह किया गया था। मामला यह है कि पत्थलगांव से खरसिया तक का सड़क बहुत ही ज्यादा खराब हो चुका था वही इस 90 से 100 किलोमीटर के बीच अगर लोग आवागमन कर रहे थे तब उन्हें कई घंटे लगते थे। छाल क्षेत्र के एडू के पास स्थित Secl कोयला खदान होने की वजह से प्रतिदिन हजारों की संख्या में ओवरलोड कोयला वाहन इस सडक पर दौड़ रही है वही खदान का डस्ट और कीचड़ वाहनों के टायर में चिपक कर मुख्य मार्ग तक पहुंचता है जिस कारण अगर देखा जाए तो वर्तमान में भी इस सड़क की हालत ऐसी है कि यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। शुरुआत से देखा जाए तो यहां सडक की स्तिथि ऐसी ही है वही इसी सडक पर आवागमन को लोग मजबूर हो रहे हैं। जिस कारण कई बार यहां सड़क निर्माण के लिए चक्का जाम किया जा चुका है वही मार्च में जो चक्का जाम हुआ उसे देखकर मानो ऐसा लग रहा था कि इस बार सड़क निर्माण हो ही जाएगा और जनता और नेता जो सड़क पर बैठे थे। वह भी अपने जींद पर थे की सड़क निर्माण कार्य शुरू होगा तभी हम हटेंगे वहीं मामला इतना गंभीर हो गया कि क्षेत्र की डीडीसी रजनी राठिया ने खरसिया Pwd एसडीओ को ही जनता के सामने फटकार लगा दी। फिर अचानक यह कहां जाता है कि हमें लिखित आश्वासन मिल गया है सड़क निर्माण हो जाएगा और कार्य शुरू हो गया है। पर वर्तमान सड़क जाकर देखा जाए तो महीने बीत गए हैं अब तक वह सड़क ज्यों का त्यों वैसा ही है। और हैरानी अब इस बात की हो रही है की जो नेता और ग्रामीण कल तक सड़क निर्माण के लिए आंदोलन कर रहें थे। वह सभी आज अचानक गायब हो गए हैं और अब सड़क निर्माण की बातें तक नहीं कर रहे हैं और इसी सड़क का उपयोग कर रहे हैं।
अब देखना यह हैं कि फिरसे कब यहां सडक निर्माण की मांग उठती हैं…और क्या यह सडक कभी निर्माण हो सकता हैं की नहीं?




