बोरों रेंज में अवैध कोयला उत्खनन और मशीन जप्ती पर कार्रवाई कौन करेगा… ‘रहस्य’ बरकरार

धरमजयगढ़ | कोयलांचल क्षेत्र धरमजयगढ़ के बोरों रेंज से एक सनसनीखेज मामला सामने आया था । यहाँ नाले के किनारे धड़ल्ले से भारी मशीनों के जरिए कोयला निकाला जा रहा था। पर अब उसमें नया मोड़ सामने आ रहा है बता दें की मुखबिर की सूचना पर एक चेन माउंटेन मशीन को जब्त किया है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर इस काले खेल के असली खिलाड़ियों पर शिकंजा कौन कसेगा?
ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, बयान में किए चौंकाने वाले खुलासे
वन उप मण्डलाधिकारी के बुलावे पर कई ग्रामीणों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से लिखवाया है कि उन्होंने उक्त चेन माउंटेन मशीन को नाले के पास कोयला खुदाई करते हुए अपनी आँखों से देखा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से सफेदपोशों के संरक्षण में खनिज संपदा की लूट मची हुई है।
*खेत सुधार का बहाना या बड़ी साजिश?*
जब्त मशीन के मालिक का दावा है कि मशीन को खेत समतलीकरण और तालाब खुदाई के लिए लाया गया था। लेकिन ग्रामीणों ने इस दावे की हवा निकाल दी है।जिस स्थान पर मशीन चल रही थी, वहां की जमीन ग्रामीणों या उनके परिचितों की है। किसी भी ग्रामीण ने खेत बनवाने के लिए मशीन की मांग नहीं की थी। क्षेत्र में जेसीबी मशीनों की कोई कमी नहीं है, ऐसे में एक साधारण किसान करोड़ों की चेन माउंटेन मशीन खेत सुधारने के लिए क्यों बुलाएगा?
“ग्रामीणों का सीधा सवाल है: क्या इलाके के किसान इतने संपन्न हो गए हैं कि वे मामूली मेढ़ बांधने के लिए माउंटेन मशीन का खर्च उठा सकें? यह स्पष्ट रूप से अवैध उत्खनन को छिपाने की एक नाकाम कोशिश है।”
*कार्रवाई की सुस्त चाल से ग्रामीणों में आक्रोश*
प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली अब संदेह के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पुख्ता साक्ष्य और चश्मदीद गवाह होने के बावजूद, अब तक दोषियों पर वैसी कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है जिसकी उम्मीद की जा रही थी। बयानों के दर्ज होने के बाद भी मामला फाइलों में घूम रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
*कौन करेगा मुख्य कार्रवाई?*
वर्तमान में स्थिति ‘सस्पेंस’ जैसी बनी हुई है। राजस्व विभाग, वन विभाग और खनिज विभाग के बीच तालमेल की कमी का फायदा खनन माफिया उठा सकते हैं। निरीक्षण के बाद मशीन जब्ती की गई, लेकिन आगे की कमान किसके हाथ में है एक तरफ वन विभाग कार्यवाही कर रहा और कह रहा फारेस्ट के तरफ से कार्यवाही होने पर संसय है वही दूसरी तरफ राजस्व विभाग कार्यवाही करने के अलावा चुप्पी साधे बैठा है। चूंकि मामला रेंज क्षेत्र का है, इसलिए वन विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
निष्कर्ष: धरमजयगढ़ के इस अंचल में जमीन के सीने को चीरकर कोयला निकालने वाले सिंडिकेट पर अगर जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का प्रशासन पर से भरोसा उठना तय है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘चेन माउंटेन’ के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब करता है या यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।




