सिथरा में रातभर चला ‘खुडखुड़िया’ का खेल….

सिथरा। गांव सिथरा में बीती रात खुलेआम अवैध ‘खुडखुड़िया’ खेल का संचालन किया गया है। जिसमें लाखों रुपये के जीत हार का खेल खुलेआम खेला गया हैं। जिसमें समिति के लोंग भी तस्वीर में दिखाई पड़ रहें हैं। देर रात तक लाखों रुपये दांव पर लगाए गए और पूरी गतिविधि बेखौफ तरीके से चलती रही। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस खेल पर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ी, क्या इतने बड़े मेला के आयोजन में पुलिस प्रशासन की मदद नहीं ली गई अगर ली गई तब वहा मौजूद सिपाही नें इस गतिविधि पर ध्यान नहीं दिया, कही ऐसा तो नहीं की थाना प्रभारी के धरमजयगढ़ में मौजूद नहीं होने के कारण यह खेल खुलेआम करवाया गया क्युकी वर्तमान थाना प्रभारी कर कार्यकाल में ऐसी घटनाएं अबतक सुनने कों नहीं मिली और उल्टा कार्यवाही की गई हैं..?

*समिति का व्यक्ति खेल के पास मौजूद :-सूत्र *
तस्वीर में साफ देख सकते हैं की बैच पहना एक व्यक्ति खुडखुड़िया खेल के पास बैठा हैं मानों वह खुद खेल रहा हो या खेलवा रहा हो। उक्त व्यक्ति की जानकारी पता करने पर उसका नाम खेम राठिया बताया गया और कहा गया यह व्यक्ति समिति से जुडा हैं। समिति से जुड़े जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही युवाओं को इस खेल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे गांव का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।स्थानीय नागरिकों ने इसे अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि जिस समिति का दायित्व गांव के विकास और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करना है, यदि उसी से जुड़े लोग ऐसे कार्यों में लिप्त पाए जाते हैं, तो यह विश्वास के साथ सीधा विश्वासघात है।
*पहले भी हो चुका हैं ऐसा खेल*
यह कोई पहली घटना नहीं है। अगर देखा जाए तों ज़ब भी सिथरा में मेला का आयोजन किया जाता हैं तब महफिल सजाने खुडखुड़िया का खेल आयोजन किया जाता हैं। इससे पहले भी रथ मेला के आयोजन में भी ऐसा खेल सिथरा में देखने कों मिला था। इस तरह की गतिविधिया हमेशा से सामने आती रहती हैं लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता है।

*क्या तस्वीर देखकर पुलिस अब करेगी कार्यवाही…?*
लोगों का कहना है कि बिना संरक्षण के इस तरह का अवैध खेल संभव ही नहीं है। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर प्रशासन अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया?गांव के जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां युवाओं को गलत राह पर धकेल रही हैं और सामाजिक वातावरण को दूषित कर रही हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कानून का भय समाप्त हो चुका है, या फिर कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं?
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक मौन रहता है और कब ठोस कदम उठाता है।




