बोरों जंगल में मशीन लगाकर कोयलें की खुदाई, रात कों होता ट्रक में लोड, एसडीएम, तहसीलदार पहुंचे घटना स्थल पर, क्या मशीन पर होगा राजसात का कार्यवाही..?
धरमजयगढ़ के बोरों रेंज अंतर्गत जंगलों के मशीन लगाकर नदी किनारे कोयला खुदाई किया जा रहा हैं जिसपर वन विभाग आँखों में पट्टी बांध कर रखे हैं। क्षेत्र में नदी किनारे पोकलेन मशीन लगाकर खुलेआम अवैध कोयला खनन किए जाने का मामला सामने आया है। खनन माफिया भारी मशीनों की मदद से नदी के अंदर और तटवर्ती इलाके से कोयला निकाल रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। रात के अंधेरे में पोकलेन मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर कोयला निकाला जा रहा है। निकाले गए कोयले को ट्रैक्टर और हाइवा से दूसरे स्थानों पर भेजा जा रहा है। इस संबंध में जब संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही और जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया।

आपकों बता दें की अवैध कोयला खनन की जानकारी स्थानीय पत्रकार द्वारा धरमजयगढ़ एसडीएम कों दी गई जिसके बाद अवैध कोयला खनन की सूचना पर एसडीएम व तहसीलदार मौके पर पहुंचे। क्षेत्र में अवैध कोयला खनन की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया और एसडीएम, तहसीलदार दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे, जिससे अवैध खनन में लगे लोगों में हड़कंप मच गया।
खनन माफिया कों प्रशासन के पहुंचने की भनक लगते ही कई लोग मौके से फरार हो गए। और घटना स्थल के पास एक पोकलेन मशीन और 3 मोटरसाइकल मौजूद थे जिसके आगे पीछे गाडी नंबर मौजूद नहीं था। निरीक्षण के दौरान तहसीलदार ने नदी तट पर हुए गड्ढों, खनन के निशान और कोयले के ढ़ेर को देखा।
उक्त स्थल के आस पास कई ऐसे जगह मौजूद थे जहा जंगलो के बीच से रास्ता बनाया गया हैं और नदी किनारे कोयले कों डंप कर रखा गया है। एक जगह तों ऐसा हैं कि नदी के पत्थरों कों तोड़ फोड़ कर रास्ता निर्माण किया गया हैं ताकी नदी के इस पार से उस पार जाया जा सके।
जानकारी यह भी मिल रही हैं की उक्त मामले पर कार्यवाही के लिए रायगढ़ से खनिज विभाग की टीम पहुंच चुकी हैं। अब देखना यह हैं कि क्या मोटरसाइकल वाहन और पोकलेन मशीन कों जप्त किया जाता हैं या नहीं और अगर जप्त किया जाता हैं तब वह किसके अधिकार क्षेत्र में आएगा। क्युकी अभी तक तों ये संशय बना हुआ हैं कि यह फारेस्ट हैं या राजस्व।
सवाल:- क्या इस पोकलेन पर फारेस्ट विभाग राजसात की कार्यवाही करेगी या फिर खाना पूर्ति के लिए राजस्व विभाग कों सौंपा जाएगा क्युकी अगर घटना स्थल राजस्व भी हो तब भी पोकलेन कों तों जंगलो के बीच रास्ते बनाकर लाया गया हैं और उसी से अन्य रास्ता कों बनाया गया हैं।




