धरमजयगढ़-हाटी सड़क किनारे नाली निर्माण में गिट्टी में मिलावट का आरोप, नाली निर्माण कार्य पर उठे सवाल

*डस्ट युक्त गिट्टी से गुणवत्ता पर संकट, युवा जनसेवा संगठन ने उजागर की सच्चाई*
धरमजयगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत धरमजयगढ़ कॉलोनी में चल रहे सड़क किनारे नाली निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही गिट्टी में डस्ट (धूल) की मिलावट पाए जाने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण के साथ-साथ नाली निर्माण का कार्य भी किया जा रहा है, लेकिन मौके पर उपयोग की जा रही सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार द्वारा डस्ट मिली गिट्टी का उपयोग कर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य की मजबूती प्रभावित हो सकती है।
*युवा जनसेवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने दिखाई सच्चाई*
मामले की सूचना मिलने पर युवा जनसेवा संगठन के कार्यकर्ता निर्माण स्थल पहुंचे और कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गिट्टी में अत्यधिक मात्रा में धूल मिश्रित पाई गई। कार्यकर्ताओं ने मौके का वीडियो एवं फोटो लेकर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया।संगठन के सदस्यों का कहना है कि डस्ट युक्त गिट्टी का उपयोग सीधे तौर पर सरकारी राशि का दुरुपयोग है और इससे आम जनता को भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका आरोप है कि इस प्रकार का निर्माण अधिक समय तक टिकाऊ नहीं रहेगा।
*गुणवत्ता मानकों की अनदेखी का आरोप*
निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली गिट्टी साफ, मजबूत और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, लेकिन मौके पर डस्ट युक्त गिट्टी का उपयोग गुणवत्ता नियमों की अनदेखी को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक धूल मिश्रित गिट्टी सीमेंट और कंक्रीट की पकड़ को कमजोर कर देती है, जिससे निर्माण जल्दी टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

*जांच की मांग तेज*
स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में इस तरह की लापरवाही से जनता का भरोसा कमजोर होता है।
*जांच और कार्रवाई की मांग*
स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी धन की बर्बादी के साथ जनता को खराब निर्माण का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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