धरमजयगढ़ में भारतमाला परियोजना पर बढ़ा विवाद, हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बीच दोबारा सर्वे से किसान नाराज

धरमजयगढ़ क्षेत्र में भारतमाला परियोजना के अंतर्गत उरगा–पत्थलगांव राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-130A) के निर्माण को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आम सूचना के अनुसार कि.मी. 114+410 से 121+450 तक सड़क के पुनः संरेखण (री-अलाइनमेंट) के लिए ग्राम बायसी कॉलोनी, बायसी, मेढ़रमार एवं धरमजयगढ़ की भूमि का 3A प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को किया गया था। प्रशासन का दावा है कि इस प्रक्रिया पर किसी भी प्रभावित पक्ष द्वारा आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद 7 अप्रैल 2026 से प्रशासनिक टीम ने स्थल निरीक्षण और भौतिक सत्यापन (सर्वे) का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

* किसानों के आरोप और हाईकोर्ट की शरण*
इस पूरे मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि पूर्व में किए गए सर्वे के दौरान उनके खेतों में बनी संरचनाओं (एस्टेक्चर) को नुकसान पहुंचाया गया था। किसानों का कहना है कि बिना उचित मुआवजा और सहमति के इस तरह की कार्रवाई उनके अधिकारों का उल्लंघन है। इसी के विरोध में उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां मामला वर्तमान में विचाराधीन है। किसानों को उम्मीद है कि न्यायालय से उन्हें राहत मिलेगी और उनकी भूमि एवं संपत्ति के साथ न्याय होगा।
* दोबारा सर्वे से बढ़ा आक्रोश, प्रशासन पर सवाल*
हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद जब प्रशासनिक टीम दोबारा सर्वे के लिए गांवों में पहुंची, तो ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। किसानों ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि पहले ही नुकसान झेल चुके क्षेत्रों में दोबारा सर्वे करना उनकी समस्याओं को और बढ़ा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह न्यायालय की प्रक्रिया की अनदेखी कर जल्दबाजी में काम कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में असमंजस और तनाव की स्थिति बनी हुई है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन न्यायालय के निर्णय का इंतजार करता है या परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखता है।





