धरमजयगढ़ में फ्लाईएश गिराता जा रहा वाहन, जनता की समस्या पर प्रशासन और नेता मौन…?

धरमजयगढ़। औद्योगिक प्रगति की आड़ में धरमजयगढ़ की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरने वाले फ्लाईएश (राख) से लदे ट्रक अब आम नागरिक के लिए जी का जंजाल बन चुके हैं। ताजा मामले में वाहन क्रमांक CG 15 AC 4708 जैसे कई ट्रक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सड़कों पर राख बिखेरते नजर आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हैं।
सड़कों पर बिछ रही मौत की चादर
शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले इन भारी वाहनों से लगातार फ्लाईएश गिर रही है। आलम यह है कि राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों का सड़कों पर चलना मुहाल हो गया है। डस्ट की वजह से विजिबिलिटी कम हो रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। वहीं, हवा में तैरते ये बारीक कण लोगों के फेफड़ों तक पहुँच रहे हैं, जिससे सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
आश्वासन निकले खोखले
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में कई बार इस समस्या को लेकर अधिकारीयों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया।हाल ही में एक नेता ना इसके खिलाफ आवाज़ उठाई पर उन्हें भी अस्वासन ही दें दिया गया। यह पहली बार नहीं हर बार बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए कि ट्रकों को तिरपाल से ढक कर चलाया जाएगा और शहर के भीतर इनकी रफ्तार और आवाजाही पर अंकुश लगाया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि आश्वासन मिलते ही विरोध के स्वर धीमे पड़ गए और अब सभी नेताओं ने इस गंभीर मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली है।
जनता के सवाल: कब होगी कार्रवाई?
आम नागरिक अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि:क्या परिवहन विभाग और प्रशासन को सड़कों पर गिरती यह राख नजर नहीं आती? नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे वाहन (जैसे CG 15 AC 4708) पर अब तक जुर्माना क्यों नहीं लगाया गया?क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है?
“हम डस्ट से परेशान हैं, घर के बाहर कदम रखना मुश्किल है। नेता चुनाव के समय आते हैं, अब कोई सुध लेने वाला नहीं है। अगर जल्द ही इन गाड़ियों पर रोक नहीं लगी, तो जन-आंदोलन तय है।” — एक स्थानीय निवासी




