धरमजयगढ़ में पंडो जनजाति के परिवारों में भय का माहौल, कहा से चुकाएंगे हजारों रुपये, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से लगाई गुहार….

धरमजयगढ़। विकासखंड धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत पुटुकच्छार के आश्रित ग्राम धोराभाटा में विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो समुदाय के परिवारों को भारी बिजली बिल मिलने का मामला सामने आया है। अचानक हजारों रुपये का बिल आने से गरीब ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। वही ग्रामीण डरे हुए हैं कि वह हजारों रुपये का बिजली बिल कहा से चुकाएंगे इस संबंध में ग्रामीणों ने एसडीएम धरमजयगढ़ को आवेदन सौंपकर मामले की जांच कर राहत दिलाने की मांग की है। पंडो जनजाति भारत की एक अत्यंत पिछड़ी और दुर्लभ जनजाति मानी जाती है। इन्हें भारत सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में रखा गया है। यह समुदाय मुख्य रूप से जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में रहता है और आज भी पारंपरिक जीवन शैली अपनाता है।
विशेष पिछडी जनजाति के लोग कहा से चुकाएंगे बिल
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में बताया गया है कि यह समस्या केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि मोहल्ले के आधा दर्जन लोगों को इस तरह का भारी भरकम बिजली बिल प्राप्त हुआ है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में अन्य लोगों को भी इसी प्रकार का बिल मिल सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूरे मोहल्ले में भय और असमंजस की स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले नियमित रूप से बिजली बिल आता था और वे अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार उसका भुगतान भी करते थे। लेकिन पिछले कुछ समय से बिजली बिल आना बंद हो गया था। इसके बाद अचानक वर्ष 2026 में हजारों रुपये का बिजली बिल जारी कर दिया गया, जिससे गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। जो लोग जंगल और पहाड़ों पर आश्रित होकर जीवन यापन करते हैं, उनके लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना लगभग असंभव है।
भारी भरकम बिजली का बिल
आवेदन में बताया गया है कि 11 हजार,16 हजार रुपये का बिजली बिल जारी किया गया,वही किसी का तों 17 हजार रुपये तक पहुंच गया। इतने अधिक बिल को देखकर ग्रामीण हैरान रह गए और उन्होंने इसे अपनी आर्थिक स्थिति के विपरीत बताया। उनका कहना है कि उनकी आय बहुत सीमित है और इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना उनके लिए संभव नहीं है।
ग्राम में निवास करने वाले पंडो जनजाति के अधिकांश परिवार पहाड़ों और जंगलों के किनारे बसे दूरस्थ इलाकों में रहते हैं। इनकी आजीविका मुख्य रूप से जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर करती है। मजदूरी, वन उपज संग्रह और छोटे-मोटे कार्यों के माध्यम से ये लोग अपना जीवन यापन करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हैं और बताया की वह बिल चुकाने के लिए तैयार हैं पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और बिजली बिल में कम से कम 70-80 प्रतिशत तक की कमी कर गरीब परिवारों को राहत प्रदान की जाए। साथ ही भविष्य में नियमित रूप से सही बिल जारी करने की व्यवस्था की जाए, ताकि इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।

इस संबंध में ग्रामीणों ने आवेदन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भी भेजी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर उचित निर्णय लेगा और विशेष पिछड़ी जनजाति के गरीब परिवारों को राहत प्रदान करेगा।





