ज्ञापन की राजनीति बनकर रह गई नेता की सक्रियता, फ्लाईएश की जहरीली धूल में घुट रही धरमजयगढ़ की जनता

धरमजयगढ़ क्षेत्र में फ्लाईएश परिवहन अब आम लोगों के लिए गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बन चुका है। इसको लेकर कुछ दिनों पहले सोशल मिडिया पर नेता के सक्रियता और जनता के हित में खड़े होने की गुड़गान की जा रही थी जिसके बाद अचानक से ना तों नेताजी सक्रिय दिखाई दिए और अबतक ना ज्ञापन दिया गया है। वही नेताजी का कहना है कि अस्वासन मिला था पर यह कैसा अश्वासन है जो मिडिया कल तक उन्ही नेता के लोकहित में आगे आने की सराहना कर रही थी वही मिडिया आज फ्लाईएश से परेशान और कार्यवाही की मांग कर रही है। क्या उस अश्वासन का कोई अर्थ नहीं रह गया या फिर नेताजी को गुमराह करने के लिए अश्वासन दिया गया था वही सवाल यह खड़ा हो रहा की अब नेता फिर ज्ञापन सौपेंगे या उनके नजर में समस्या का समाधान हो गया है

*नियमों की खुलेआम धज्जियां, सड़क पर गिरती फ्लाईएश और जिम्मेदार गायब*
फ्लाईएश से लदे ट्रक बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। न तो ट्रकों को ठीक से ढका जा रहा है और न ही परिवहन के नियमों का पालन किया जा रहा है। ट्रकों को ओवरलोड लेकर जाया जा रहा और बॉडी से 1-2 फ़ीट ऊपर तक फ्लाईएश भरकर लें जाया जा रहा।टायर बचाने के चक्कर में वाहन चालकों द्वारा लिफ्टर (टायर) को ऊपर करके कम चक्के पर वाहन दौड़ाया जा रहा है। वही जहां-जहां ट्रकों से फ्लाईएश गिरती है, वहां चालक और वाहन मालिक मौके से फरार हो जाते हैं जिसका उदाहरण प्रेमनगर में देखा जा सकता है हादसे के बाद वाहन तों गायब है पर फ्लाईएश महीनों से उसी खेत में पड़ा है। इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि किसानों की मेहनत भी बर्बाद हो रही है। यह पूरी स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारों की अनदेखी को साफ तौर पर उजागर करती है।

*सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ रहे ट्रकों से उड़ती राख और धूल ने पूरे इलाके को प्रदूषण की गिरफ्त में ले लिया है। राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है, दुकानदार दिनभर धूल झेलने को मजबूर हैं और घरों के अंदर तक जहरीली राख पहुंच रही है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन मौन साधे बैठे हैं, जिससे जनता में भारी नाराजगी है।*
*ज्ञापन देने की बात सिर्फ दिखावा, जनता पूछ रही—कब मिलेगी राहत?*
इस गंभीर समस्या पर पदाधिकारियों द्वारा ज्ञापन देने की बात केवल सोशल मीडिया तक सीमित नजर आ रही है। जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनता अब सीधे सवाल कर रही है कि आखिर कब यह ज्ञापन वास्तव में दिया जाएगा और कब उन्हें इस जहरीली धूल से राहत मिलेगी। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही फ्लाईएश परिवहन पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाया गया और नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब यह देखना होगा कि जिम्मेदार लोग कब जागते हैं या फिर जनता को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरना……..




