जंगल के ऊपर उड़ता दिखा हवाई जहाज, ग्रामीणों में चिंता

पुरुँगा, समरसिंघा और कोकदार के ग्रामीणों ने जंगल क्षेत्र के ऊपर एक हवाई जहाज को चक्कर लगाते हुए देखा, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कहीं यह मेसर्स अंबुजा सीमेंट अडानी ग्रूप कंपनी द्वारा भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया तो नहीं है।
*घटना का विवरण…*
गांव वालों नें बताया की यह जहाज पहले समरसिंघा से कोकदार की तरफ गया और उसके बाद पुनः कोकदार से समरसिंघा की ओर चला गया। इस बात कों लेकर ग्रामीण इसलिए भी चिंतित हैं क्युकी यही वह स्थान हैं जहा भूमिगत कोयला खदान प्रस्तावित हैं पहले भी इस क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर गहमा गहमी हो चुकी हैं। कुछ लोगों ने अडानी समूह का नाम लेते हुए आशंका जताया हैं कि कंपनी दोबारा जंगल क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की कोशिश कर सकती है। हालांकि इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
*विमान उडाने के हो सकते हैं दूसरा भी कोई कारण*
इस प्रक्रिया के सम्बन्ध में ज़ब जानकारी एकत्र करने का प्रयास किया गया तब एक बात निकलकर सामने आई की ओपन खदान के लिए विमान उड़ाया जाता हैं और भूमिगत के लिए यह अनिवार्य नहीं। यह भी हो सकता हैं कि आस पास किसी और कार्य की तैयारी चल रही उसके लिए विमान उड़ाया जा रहा हैं। ऐसे में ग्रामीणो कों सतर्क रहना होगा कही लोंग कुछ और समझते रहें और कुछ और ही घटना घट जाए।
गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने प्रशासन से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कोई सर्वेक्षण या परियोजना प्रस्तावित है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों में भ्रम और डर की स्थिति न बने।ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की सहमति और पारदर्शिता अनिवार्य हो।
*हाल में में ग्रामीणों नें लड़ी थी लड़ाई *
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पुरूंगा में मेसर्स अंबुजा सीमेंट अडानी ग्रुप का भूमिगत कोयला खदान प्रस्तावित है यह कोयला खदान भूमिगत तो है पर इसका विरोध क्षेत्र में इतना ज्यादा है कि अब तक शायद ही किसी कोयला खदान का ऐसा विरोध देखने को मिला होगा। कलेक्टर परिसर के बाहर मुख्य मार्ग पर धरना दिए और करीब 35 घंटे तक सड़क पर ही बैठे रहें। ज़ब वहा से वापस आकर गांव वालों नें अपने क्षेत्र में विरोध किया तब अचानक खबर सामने आती है कि पुरुँगा जनसुनवाई को सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण रायपुर द्वारा रायगढ़ कलेक्टर के पत्र के बाद स्थगित कर दिया गया है असली कारण किसी के सामने नहीं आया।
*क्यों हुआ पुरुँगा कोयला जनसुनवाई खदान स्थगित..?*
ज़ब जानकारी निकाली गई तब जनसुनवाई स्थगित होने का असली कारण सामने आया हैं। जिसमें साफ लिखा गया हैं कि प्रबंधन द्वारा जनसुनवाई स्थगित करने का अनुरोध जिला कलेक्टर से किया गया हैं। वही यह बात समझ से परे हो गया हैं प्रबंधन मेसर्स अम्बुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप) द्वारा आखिर जनसुनवाई स्थगित करने का अनुरोध क्यों किया गया। अब अचानक यह घटना घटने के बाद फिरसे इस क्षेत्र में विरोध के स्वर देखने कों मिलने लगे हैं।




