छाल-खरसिया मुख्य मार्ग 22 करोड़ रूपये से बनेगा,, हाटी–पुरुंगा तक बनेगी मुरूम सड़क

रायगढ़, 21 फरवरी 2026। खनिज उत्खनन से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। छाल मुख्य मार्ग के पक्कीकरण तथा हाटी से पुरुंगा तक नई मुरूम सड़क निर्माण की योजना तैयार की गई है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
*छाल-खरसिया मुख्य मार्ग व हाटी-पुरुँगा मार्ग*
लगभग साढ़े चार से पांच किलोमीटर लंबे छाल पहुंच मार्ग के पक्कीकरण के लिए करीब 22 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई गई है। यह निर्माण कार्य जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) तथा सीएसआर मद के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा।

*ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन सक्रिय*
क्षेत्र भ्रमण के दौरान कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के समक्ष ग्रामीणों ने खरसिया से छाल पहुंच मार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर नई पक्की सड़क निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क लंबे समय से खराब होने के कारण किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए बताया कि सड़क निर्माण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर ली गई है और इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। प्रस्तावित सड़क निर्माण से आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम होगा।
*हाटी से पुरुंगा तक बनेगी मुरूम सड़क*
भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने जंगल क्षेत्र से गुजरने वाले हाटी–पुरुंगा कच्चे मार्ग को मुरूम सड़क में विकसित करने की मांग भी रखी। कलेक्टर ने मौके पर निरीक्षण कर मार्ग की स्थिति का जायजा लिया तथा धरमजयगढ़ वन मंडल के अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए। इस मार्ग निर्माण को सैद्धांतिक सहमति भी प्रदान कर दी गई है।

*ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ*
ग्रामीणों के अनुसार यह वनांचल क्षेत्र का प्रमुख संपर्क मार्ग है। मुख्य सड़कों से यात्रा करने पर दूरी अधिक पड़ती है, जबकि जंगल मार्ग से समय और श्रम दोनों की बचत होती है। किसान, स्थानीय व्यापारी तथा स्कूली छात्र इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। क्षेत्र हाथी विचरण क्षेत्र होने के कारण सुरक्षित और मजबूत सड़क की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।नई सड़क परियोजनाओं के पूर्ण होने से खनिज प्रभावित इलाकों में आवागमन, शिक्षा, कृषि गतिविधियों और ग्रामीण जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।





