क्यों हुआ पुरुँगा कोयला खदान जनसुनवाई स्थगित, चौंकाने वाला असली कारण आया सामने

धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत पुरूंगा में मेसर्स अंबुजा सीमेंट अडानी ग्रुप का भूमिगत कोयला खदान आवंटित है यह कोयला खदान भूमिगत तो है पर इसका विरोध क्षेत्र में इतना ज्यादा है कि अब तक शायद ही किसी कोयला खदान का ऐसा विरोध देखने को मिला होगा। रायगढ़ में ऐसा शायद ही हुआ था की किसी कोल ब्लॉक प्रभावित क्षेत्र के लोग इस तरीके से कलेक्टर परिसर के बाहर मुख्य मार्ग पर धरना दिए और करीब 35 घंटे तक सड़क पर ही बैठे रहें। पर पुरुँगा के लोगों ने दिखा दिया कि विरोध करना कोई हमसे सीखे इससे कुछ ही दिन पहले ज़ब जिंदल की जनसुनवाई स्थगित हुई थी इसके बाद अधिकारियों ने यह तक कह दिया था कि वह किसी कीमत पर इस जनसुनवाई को स्थगित नहीं करेंगे इसी का नतीजा था कि इतनी देर मुख्य मार्ग पर हजारों की संख्या में बैठे ग्रामीणों से मिलने जिला कलेक्टर नहीं आए और उनके अधीनस्थ कर्मचारी आकर ग्रामीणों से बातचीत करते रहे और उन्हें समझाइए देते रहें। थक हारकर ग्रामीणों ने यह चेतावनी देते हुए घर की ओर रुख किया कि इतनी देर हम बैठे पर जिला कलेक्टर मिलने नहीं आए अब जनसुनवाई करवाने कोई भी अधिकारी हमारे गांव जाकर दिखाएं, यह कहते हुए गांव वालों ने जनसुनवाई से कुछ दिन पहले जितने भी मुख्य मार्ग और पगडंडी रास्ते थे सभी पर पहरा लगा दिया और बंद करते हुए दिन रात जागने लगे। तब अचानक खबर सामने आती है कि पुरुँगा जनसुनवाई को सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण रायपुर द्वारा रायगढ़ कलेक्टर के पत्र के बाद स्थगित कर दिया गया है असली कारण किसी के सामने नहीं आया। पर ज़ब जानकारी निकाली गई तब जनसुनवाई स्थगित होने का असली कारण सामने आया हैं। जिसमें साफ लिखा गया हैं कि प्रबंधन द्वारा जनसुनवाई स्थगित करने का अनुरोध जिला कलेक्टर से किया गया हैं। वही यह बात समझ से परे हो गया हैं प्रबंधन मेसर्स अम्बुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप) द्वारा आखिर जनसुनवाई स्थगित करने का अनुरोध क्यों किया गया। क्या मेसर्स अंबुजा सीमेंट ने यह भाप लिया था की ग्रामीण जिस तरीके से विरोध कर रहें उससे जनसुनवाई सफल नहीं हो पाएगा या मामला कुछ और ही है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही की अब कंपनी ग्रामीणों का भरोषा जीतेगी और भरोषा जीतने के बाद ही जनसुनवाई कराने का अनुरोध करेगी। वही कंपनी ग्रामीणों का भरोषा जीतने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना सकती हैं जिसमें वो इस बात पर ज्यादा ध्यान देंगे की किस ग्रामीण की क्या इच्छा हैं। ऐसे मे ग्रामीण अगर एकजुट ना रहें तो उनके बीच ही फुट पड़ सकता हैं।



